सिर्फ अमृतसर में है ऐसी व्यवस्था बिहार के सभी जेलों में नयी व्यवस्था लागू। शुरुआत भागलपुर से


जेलों में बंद कैदियों को अवसाद से दूर रखने की दिशा में सरकार महत्वाकांक्षी योजनाओं को जमीन पर लाने की तैयारी कर रही है। बहुत जल्द ही भागलपुर की तीनों जेलों समेत सूबे की 58 जेलों में कैदियों को जमीन पर सोने की पुरातन व्यवस्था से निजात दिलाई जाएगी।

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शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा, महिला मंडल कारा, विशेष केंद्रीय कारा समेत सूबे की जेलों में कैदियों को अब घर जैसा माहौल दिया जाएगा। बंदी वार्ड को पेंट कर चकाचक किया जाएगा। उन्हें हॉस्टल जैसी व्यवस्था दी जाएगी। ताकि उनके मन में अवसाद के भाव नहीं पनपे। अब तक ऐसी व्यवस्था देश में अमृतसर जेल में ही है। जहां कैदियों को लकड़ी का बेड मुहैया कराया गया है। वहां लकड़ी के बेड से किसी किस्म की असुरक्षा सामने नहीं आई। यह भी देखा गया कि कैदियों में अवसाद की शिकायत कम हुई। उसी के तर्ज पर सूबे के 58 जेलों में ऐसी सुविधाएं मुहैया कराने की योजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी है। अभी तक सूबे की जेलों में बेड की सुविधाएं केवल जेल के हॉस्पीटल वार्ड में ही मिला करती है।

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बैरकों और वार्डों को हॉस्टल में बदला जाएगा

जेल परिसर में मौजूद बैरक और वार्ड को योजना के तहत हॉस्टल में बदला जाना है। जिसमें तमाम तरह की सुविधाएं मौजूद रहेंगी। कैदियों के लिए पेयजल सुविधाएं निकट भविष्य में हॉस्टल कक्ष में ही होगा। ऑर्ट ऑफ लिविंग, योग कक्षाएं, प्रजापिता ब्रहाकुमारी की कक्षाओं में एक नियमित कराने की योजना है। सायंकालीन खेल और उससे जुड़ी प्रतियोगिताएं सप्ताह में एक दिन कराने की योजना है।

 

 

कारा मुख्यालय पटना के जेल उप महानिरीक्षक नीरज कुमार झा ने कहा कि बदलते दौर में सुधारात्मक प्रक्रिया के तहत बंदियों के लिए निकट भविष्य में कई योजनाएं लाई जानी हैं। कैदियों को लकड़ी का बेड मुहैया कराया जाना इन्हीं योजनाओं में एक है, जिसके बेहतर परिणाम सामने होंगे।


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