ग़लत कश्ती ने DPRO और कुमार प्रभाकर दोनो को ले डूबा, पैसों का खेल तो कोई और कर रहा था…


DPRO भागलपुर शहर में एक काफ़ी जाना पहचाना और उतना ही बदनाम हुआ नाम. आइए पहले चर्चा कर लेते हैं DPRO भागलपुर के अच्छे दिन की, कम्पनी भागलपुर में आयी, हर अख़बार, हर Event हर जगह बस भागलपुर में DPRO ही दिखता रहता था. ये दौर 2013-2015 का था, कम्पनी में ना क्लाइयंट की कमी थी ना कम्पनी के पास ज़मीन की, कुमार प्रभाकर ख़ुद उस वक़्त बैठ कर ग्राहक मामलों को देखते थे.

 

पज़िशन की बात रही हो, रजिस्ट्री की बात हो या रीफ़ंड की कुमार प्रभाकर शुरुआती दिनों में सभी ग्राहकों के समस्या ख़ुद देखते और जहा कही समस्या भी होती वहा वो ख़ुद ही जाते और मामलों का निपटारा करते थे. 2015 साल का अंत होने को था, ज़मीन का कारोबार भागलपुर ठीक ढंग से चल रहा था, तभी सिलीगुड़ी से भी कुछ बेहतर चीज़ें नज़र आने अगी थी, फ़ार्महाउस कॉन्सेप्ट को लॉंच करने के लिए कुमार प्रभाकर सिलीगुड़ी में फ़ोकस हो गए.

 

DPRO में चीज़ें एक कम्पनी अधिकारी के ज़िम्मे छोड़ दी गयीं, जिसके पास चेक से लेकर कम्पनी के लगभग सारे अधिकार थे, मामला यही से गड़बड़ हुआ, कुमार प्रभाकर विश्वासी क़िस्म के इंसान थे, अतः वो सिलीगुड़ी के फ़ार्म्हाउस प्रोजेक्ट के लिए लग गए, और इधर कुमार प्रभाकर की अनुपस्थिति में DPRO अधिकारी कुमार प्रभाकर और DPRO के नाम के ऊपर मनमाने रास्ते से पैसे लेने लगे, जैसे की कैश में पैसे और जूठे रसीद, आदि से कम्पनी के बजाय ख़ुद के लिए पैसे लेने में DPRO अधिकारी रम गये.

 

जब कम्पनी को असल में पैसे नही पहूचे और लोगों की शिकायत बढ़ने लगी तो कुमार प्रभाकर के पास ये बातें पहुँची तब तक बहुत देर हो चुकी थी, और 2017 का आधा वर्ष पार हो चुका था, कम्पनी के अधिकारी तब तक लोगों को उलझाते रहे, घुमाते रहे और बर्गला कर समय काटते रहे. जब मामला अति गम्भीर हुआ और कुमार प्रभाकर को इसकी पूरी जानकारी मिली तो फ़ौरन कुमार प्रभाकर ने सभी ग्राहकों को कम्पनी आने हेतन आमंत्रण भेजा.

 

लोग आए बातें बतायीं तब इस बड़े घोटाले की ख़बर लगी और कुमार प्रभाकर ने हर तरीक़े से ग्राहकों को संतुस्त करने हेतु दो ऑप्शन दिए, चुकी आपका पैसा जमा हैं, आप हमारे यहा से ज़मीन ले ले या वो पैसे रीफ़ंड ले ले. ग्राहकों से बात करने के उपरांत ज़्यादातर ग्राहक ज़मीन लेने हेतु पर मुहर लगाए और सबकी रजिस्ट्री शुरू करा दी गयीं.

 

लेकिन तभी 2019 में एक मामला आ कर फँसा, एक पुलिस थानेदार ने ये दावा किया की DPRO ने उससे पैसा लिया और ज़मीन नही दिया, और आनन फ़ानन में कुमार प्रभाकर को सलाखों के पीछे और पुरानी सारी फ़ाइल खोल दी गयीं. कुछ गड़बड़ हुआ हैं इस मामले में वो अगली कड़ी में बताऊँगा जिसके पुखते सबूत भी जारी करूँगा तब तक पढ़ते रहें MyBhagalpur.com

 

  • आख़िर उस पुलिस वाले ने ट्रैंज़ैक्शन की कोई डिटेल क्यू नही दी वो भी 6 महीने के बाद ?
  • कौन था वो DPRO का अधिकारी जो खेल गया गेम
  • इन सबके बावजूद भी DPRO का क्या हैं आगे का प्लान

कुछ इंतज़ार कीजिए सारी बातें ले कर सबूतों के साथ आऊँगा, आपको पढ़ाऊँगा और फिर…

 


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