पटना की सड़कों पर और जदयू कार्यालय के बाहर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को ‘फ्यूचर सीएम ऑफ बिहार’ बताते हुए पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों से बिहार की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। जदयू कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए इन पोस्टरों में यह भी लिखा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार वासियों के लिए पद नहीं छोड़ना चाहिए, जिससे उनके संभावित राज्यसभा जाने की अटकलें और तेज हो गई हैं।
कौन हैं निशांत कुमार और क्या हैं ताजा घटनाक्रम?
निशांत कुमार, जो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे हैं, उन्होंने 8 मार्च, 2026 को आधिकारिक तौर पर जनता दल (यूनाइटेड) (जेडीयू) में शामिल हुए थे। 28 मार्च, 2026 को पटना में जदयू कार्यालय के बाहर उन्हें ‘फ्यूचर सीएम ऑफ बिहार’ बताते हुए पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से यह अपील भी की गई कि वे बिहार के मुख्यमंत्री पद को न छोड़ें, जो उनके राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं की चिंता को दिखाता है।
निशांत कुमार हाल के दिनों में काफी सक्रिय हो गए हैं, उन्होंने 27 मार्च, 2026 को पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कीं। ऐसी भी खबरें हैं कि वे मुख्यमंत्री आवास पर एनडीए के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक ‘गुप्त बैठक’ की योजना बना रहे हैं, क्योंकि नीतीश कुमार के 72 घंटे के भीतर इस्तीफा देने की अटकलें चल रही हैं। जदयू में उनके औपचारिक प्रवेश को राज्य सरकार में उनकी संभावित भागीदारी का मार्ग माना जा रहा है, यहां तक कि उनके उपमुख्यमंत्री बनने की चर्चाएं भी चल रही हैं।
इस मामले पर नेताओं और अधिकारियों के क्या बयान हैं?
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पहले कहा था कि पार्टी कार्यकर्ता और शुभचिंतक निशांत कुमार की पार्टी में भागीदारी चाहते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय निशांत और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ही होगा। मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने निशांत कुमार को ‘मुख्यमंत्री बनने लायक’ बताया, लेकिन साथ ही कहा कि अभी किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी मुख्यमंत्री पद के लिए एक संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। हालांकि, अभी तक न तो जदयू और न ही उसके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साझेदारों ने उत्तराधिकार के सवाल पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है।

