रोहतास जिले के सासाराम में कैमूर पहाड़ी क्षेत्र के सैकड़ों आदिवासियों ने प्रस्तावित टाइगर रिजर्व के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। रेलवे मैदान से शुरू हुई यह रैली सासाराम की मुख्य सड़कों से होते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) के कार्यालय तक पहुंची। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर उनकी आजीविका छीनने और बिना किसी ठोस आधार के 58 गांवों को उजाड़ने का आरोप लगाया है। आदिवासियों ने साफ़ तौर पर कहा कि वे अपनी पुश्तैनी ज़मीन किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।
टाइगर रिजर्व के विरोध में क्यों उतरे आदिवासी?
आदिवासियों का तर्क है कि कैमूर के जंगलों में बाघों की कोई ऐतिहासिक मौजूदगी नहीं रही है, फिर भी वन्य विभाग टाइगर रिजर्व के नाम पर उन्हें उनकी ज़मीन से बेदखल करने की कोशिश कर रहा है। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि वन विभाग आज भी आदिवासियों के साथ गुलामों जैसा व्यवहार करता है। इस प्रस्ताव के लागू होने से करीब 58 गांवों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है, जिससे हजारों परिवारों का जीवन प्रभावित होगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपनी नीति नहीं बदली तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
क्या हैं आदिवासियों की मुख्य मांगें?
कैमूर वन अधिकार संघर्ष मोर्चा और अखिल भारतीय आदिवासी मंच ने संयुक्त रूप से जिला प्रशासन को 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। इन मांगों में वन अधिकार कानून 2006 को कड़ाई से लागू करने और आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों को मान्यता देने की बात प्रमुख है।
- वन अधिकार कानून 2006 (FRA) को पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
- 58 गांवों को विस्थापित करने के प्रस्ताव को तुरंत वापस लिया जाए।
- जल-जंगल-ज़मीन पर आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा हो।
- क्षेत्र में वन विभाग की कथित मनमानी पर रोक लगाई जाए।
कैमूर टाइगर रिजर्व से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े
बिहार सरकार ने कैमूर वन्यजीव अभयारण्य को राज्य का दूसरा टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। वर्तमान में बिहार में केवल वाल्मीकि टाइगर रिजर्व ही संचालित है। कैमूर के इस प्रस्तावित रिजर्व के लिए केंद्रीय स्तर पर प्रक्रिया चल रही है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| कुल क्षेत्रफल | 1,504 से 1,784 वर्ग किलोमीटर |
| प्रभावित जिले | कैमूर और रोहतास |
| प्रस्तावित विस्थापन | 58 गांव |
| प्रदर्शनकारी संगठन | कैमूर वन अधिकार संघर्ष मोर्चा |

