बिहार के कानूनी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। बिहार स्टेट बार काउंसिल ने राज्य के सभी 129 अधिवक्ता संघों के चुनावों में महिला वकीलों के लिए 33 प्रतिशत यानी एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का निर्देश जारी किया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश और पटना हाईकोर्ट के पत्र के बाद लिया गया है। इस नियम के लागू होने से अब बार संघों के नेतृत्व में महिलाओं की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
चुनावों में आरक्षण के नए नियम क्या हैं?
बिहार स्टेट बार काउंसिल के निर्देश के अनुसार, अब राज्य के किसी भी एडवोकेट एसोसिएशन के चुनाव में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित रहेंगी। इसमें सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2025 के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। इस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए परिषद ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी कर दी है।
- कुल सीटों का 33% हिस्सा महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित होगा।
- यह नियम पटना हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन समेत राज्य के सभी 129 संघों पर समान रूप से लागू होगा।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इसमें 20% निर्वाचित और 10% सहयोजित सीटें शामिल होंगी।
- पटना हाईकोर्ट ने इस संबंध में बार काउंसिल को पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
किन संस्थानों पर होगा इस फैसले का असर और क्या है उद्देश्य?
यह फैसला 3 अप्रैल, 2026 से प्रभावी माना जा रहा है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने पहले ही बिहार से इस बड़े बदलाव की शुरुआत करने का आश्वासन दिया था। अब बिहार स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
इस बदलाव से महिला वकीलों को बार काउंसिल और स्थानीय संघों के प्रबंधन में सीधे तौर पर हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। पटना हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के चल रहे चुनावों में भी अब इन दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। इससे पहले मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने आरक्षण लागू करने को लेकर मार्गदर्शन मांगा था। यह नया नियम कानूनी पेशे में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिला अधिवक्ताओं को नेतृत्व प्रदान करने के लिए लाया गया है।

