बिहार के सभी नगर निकायों में आज 1 अप्रैल से कचरा कलेक्शन के नए नियम प्रभावी हो गए हैं. इन नियमों के तहत अब नागरिकों को अपने घर के कचरे को चार अलग श्रेणियों में बांटकर देना होगा. बिहार सरकार ने कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए यह सख्त कदम उठाया है ताकि नगरों की स्वच्छता बनी रहे. नियमों का पालन नहीं करने वाले लोगों पर प्रशासन की ओर से अब कड़े कदम उठाए जा सकते हैं.
कचरा देने का नया तरीका और जरूरी डस्टबिन
नगर निकायों के आदेश के अनुसार अब हर घर को कचरा अलग-अलग रंगों के डस्टबिन में रखना होगा. यह नियम गीला और सूखा कचरा अलग करने के अलावा स्वास्थ्य से जुड़ी सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण बताया गया है. नागरिकों को अब चार डस्टबिन का उपयोग करना होगा:
- गीला कचरा: रसोई का बचा हुआ सामान और फल सब्जियों के छिलके.
- सूखा कचरा: प्लास्टिक, कागज, गत्ता और अन्य ठोस वस्तुएं.
- सेनेटरी वेस्ट: उपयोग किए गए डायपर और नैपकिन जैसी चीजें.
- स्पेशल केयर वेस्ट: कांच के टुकड़े, दवा की खाली बोतलें और अन्य नुकीली चीजें.
सफाईकर्मी अब केवल उसी कचरे को स्वीकार करेंगे जो इन श्रेणियों में अलग करके रखा गया होगा. यदि कचरा मिला हुआ पाया जाता है तो सफाईकर्मी उसे उठाने से इनकार कर देंगे और इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी.
बड़ी संस्थाओं और जुर्माना पर सरकारी आदेश
नियमों में उन संस्थानों के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए हैं जहां बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है. जो संस्थान या अपार्टमेंट प्रतिदिन 100 किलो से अधिक कचरा पैदा करते हैं, उन्हें अपने परिसर के भीतर ही प्रोसेसिंग यूनिट लगानी होगी. इसका उद्देश्य बड़े कचरा स्रोतों को उनके स्थान पर ही निस्तारित करना है ताकि डंपिंग यार्ड पर बोझ कम हो सके.
नियमों का उल्लंघन करने वाले नागरिकों और संस्थानों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है. नगर निकाय की टीमें समय-समय पर शहरों में इसकी जांच करेंगी. 1 अप्रैल से सभी निकायों में सफाईकर्मियों को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे कचरा उठाते समय उसकी सही से जांच कर सकें. यदि कोई घर बार-बार नियमों को तोड़ता है तो उन पर नगर निकाय कानून के तहत कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.

