बिहार पंचायत चुनाव 2026 को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हलचल शुरू हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की प्रारंभिक तैयारियां तेज करते हुए जिला स्तर पर अधिकारियों की तैनाती के आदेश जारी कर दिए हैं। इस बार का चुनाव तकनीकी रूप से काफी एडवांस होगा क्योंकि प्रशासन ने मतदान के दौरान धांधली और फर्जी वोटिंग रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए हैं।
चुनाव प्रक्रिया और नई तकनीक के बड़े बदलाव
बिहार में पहली बार पंचायत चुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का उपयोग किया जाएगा। मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य और जिला परिषद सदस्य समेत सभी छह पदों के लिए मल्टी-पोस्ट EVM का इस्तेमाल होगा। इसके अलावा बूथों पर फर्जी मतदाताओं की पहचान के लिए फेशियल रिकग्निशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया में ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) सिस्टम भी लागू किया जाएगा जिससे हिंसा और धांधली पर लगाम लगाई जा सके।
आरक्षण नियम और उम्मीदवारों की पात्रता
| नियम का नाम | मुख्य विवरण |
|---|---|
| संभावित मतदान समय | नवंबर-दिसंबर 2026 |
| आरक्षण आधार | 2011 की जनगणना (रोस्टर में होगा बदलाव) |
| संतान नियम | 2006 के बाद दो से अधिक बच्चे वाले पात्र नहीं होंगे |
| आरक्षण सीमा | SC, ST, EBC और महिलाओं के लिए अधिकतम 50% |
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि चुनाव मौजूदा वार्डों के आधार पर ही होंगे और नए परिसीमन की योजना नहीं है। जिला दंडाधिकारियों को जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं जिला पंचायत राज अधिकारियों को उप निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया है। आयोग ने मतदाता सूची तैयार करने के लिए नगर निकायों में निबंधन अधिकारियों की नियुक्ति भी शुरू कर दी है।

