बिहार की राजधानी पटना में अब उत्तर प्रदेश के वाराणसी की तर्ज पर भव्य गंगा महाआरती का आयोजन किया जाएगा। राज्य सरकार और बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) ने इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए तैयारी शुरू कर दी है। पहले चरण में पटना के दो महत्वपूर्ण घाटों को इस धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए चुना गया है। इसके लिए विभाग ने टेंडर जारी कर दिया है और इच्छुक ऑपरेटरों से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
किन घाटों पर होगी आरती और क्या है तैयारी?
पटना के दीघा स्थित Paryatan Ghat और पटना सिटी के Mitan Ghat को इस नई शुरुआत के लिए चुना गया है। जो भी कंपनी या एजेंसी इस टेंडर को हासिल करेगी, उसे घाट की सजावट, पूजा सामग्री की उपलब्धता, योग्य पुजारियों की व्यवस्था और साउंड सिस्टम लगाने की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस योजना को भव्य रूप दिया जाए और घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
नियम और सुरक्षा से जुड़ी मुख्य जानकारियां
इस प्रोजेक्ट को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए प्रशासन ने कुछ कड़े नियम और सुरक्षा मानक तय किए हैं। इससे न सिर्फ पर्यटन बढ़ेगा बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
- टेंडर में शामिल होने वाले उद्यमियों को 1,00,000 रुपये की सुरक्षा राशि (Security Deposit) जमा करनी होगी।
- घाटों पर भीड़ प्रबंधन के लिए मजिस्ट्रेट, पुलिस बल और CCTV कैमरों की निगरानी रहेगी।
- साफ-सफाई और अनुशासन बनाए रखने के लिए विशेष वालंटियर्स तैनात किए जाएंगे।
- इस पहल का मकसद धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ गंगा नदी की स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना है।
- इससे पहले पटना के गांधी घाट पर होने वाली आरती श्रद्धालुओं के बीच काफी लोकप्रिय रही है।

