बिहार के मधुबनी जिले के जयनगर में तैनात बिजली विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मनोज कुमार रजक के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट (EOU) ने 17 मार्च 2026 को इंजीनियर के 7 ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और कई महत्वपूर्ण संपत्तियों को छिपाने के सबूत मिले हैं। यह कार्रवाई इंटेलिजेंस रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किए गए मुकदमे के बाद की गई है।

छापेमारी में बरामद हुई संपत्तियों का विवरण क्या है?

EOU की टीम ने जब इंजीनियर मनोज रजक के ठिकानों की तलाशी ली, तो वहां से करोड़ों रुपये की चल और अचल संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए। शुरुआती जांच में पता चला है कि रजक ने अपनी घोषित आय से लगभग 62.66 प्रतिशत अधिक संपत्ति जमा की थी। अधिकारियों ने दरभंगा, अररिया और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में मौजूद कई जमीनों के कागजात जब्त किए हैं।

संपत्ति/सामान विवरण
जमीन के दस्तावेज 17 (दरभंगा, अररिया, सिलीगुड़ी में)
जमीन का बाजार मूल्य 3 करोड़ रुपये से अधिक
नकद (Cash) 1,05,000 रुपये
बैंक बैलेंस 4,25,000 रुपये
वाहन 2 (Swift Dzire और Scorpio)
वित्तीय दस्तावेज लगभग 1 करोड़ रुपये

परिवार के सदस्यों के नाम पर निवेश और अन्य खुलासे

जांच में यह बात सामने आई है कि मनोज रजक ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर भी अवैध संपत्ति बनाई थी। उनके भाई संजय रजक के नाम पर ‘इंजीनियर एचपी गैस ग्रामीण वितरक’ नामक एजेंसी संचालित थी, जिसे बाद में मनोज के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया। इसके अलावा उनकी पत्नी वीणा श्री भारती के नाम पर दरभंगा-बिरोल रोड पर पेट्रोल पंप के लिए जमीन लीज पर ली गई थी।

  • इंजीनियर ने अपनी वार्षिक संपत्ति रिपोर्ट में कई संपत्तियों की जानकारी छिपाई थी।
  • नेपाल और दरभंगा में अवैध निर्माण के दस्तावेज भी जांच के घेरे में हैं।
  • यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 के तहत की गई है।
  • EOU अधिकारियों के अनुसार अभी दस्तावेजों की जांच जारी है और नए खुलासे हो सकते हैं।

Swasti is Patna Local Journalist covering patna and nearby news, views and Interviews.

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