दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका देते हुए उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने लैंड फॉर जॉब्स केस में ट्रायल पर रोक लगाने की मांग की थी। 24 मार्च 2026 को जस्टिस Ravinder Dudeja ने सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले की कार्यवाही रोकने का कोई ठोस कारण नहीं है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि लालू प्रसाद यादव की याचिका में कोई मेरिट नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।
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मामले की कानूनी कार्यवाही और अब तक का घटनाक्रम
राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज Vishal Gogne ने 9 जनवरी 2026 को इस मामले में लालू यादव और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आरोप तय किए थे। CBI ने इस मामले में 18 मई 2022 को FIR दर्ज की थी। यह पूरा मामला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में नौकरी देने के बदले लोगों से बाजार भाव से बहुत कम कीमत पर जमीनें लिखवाई गईं।
लालू यादव के वकील की दलील और कोर्ट की टिप्पणी
लालू यादव की ओर से वरिष्ठ वकील Kapil Sibal ने कोर्ट में दलील दी कि Prevention of Corruption Act की धारा 17A के तहत किसी भी जांच के लिए पहले मंजूरी लेना जरूरी है। उनका कहना था कि चूंकि लालू यादव ने उस समय मंत्री के रूप में कार्य किया था, इसलिए यह नियम लागू होता है। हालांकि, CBI की ओर से पेश ASG S.V. Raju ने इसका विरोध किया। ट्रायल कोर्ट ने पहले ही टिप्पणी की थी कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया।
| मुख्य तारीखें और डेटा | जानकारी |
|---|---|
| FIR दर्ज होने की तारीख | 18 मई 2022 |
| आरोप तय होने की तारीख | 9 जनवरी 2026 |
| कथित घोटाले की अवधि | 2004-2009 |
| हाई कोर्ट का ताजा फैसला | 24 मार्च 2026 |
इस मामले में लालू प्रसाद यादव के अलावा उनकी पत्नी Rabri Devi और बच्चे Tejashwi Yadav, Tej Pratap Yadav, Misa Bharti और Hema Yadav भी आरोपी बनाए गए हैं। Enforcement Directorate (ED) भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है।

