आदिलाबाद RIMS अस्पताल में आग से मातम: 3 मासूमों की मौत, KTR ने सरकार को घेरा

तेलंगाना के आदिलाबाद जिले से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ RIMS अस्पताल में शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी आग ने तीन मासूम शिशुओं की जान ले ली। इस हादसे ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।
KTR का तीखा हमला: 'स्वास्थ्य क्षेत्र को किया जा रहा है बर्बाद'
BRS के वर्किंग प्रेसिडेंट के.टी. रामा राव (KTR) ने इस दुखद घटना के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के पद संभालने के बाद से सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है।
"मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को इस घटना की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने सत्ता में आने के बाद से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है।"
हादसे का विवरण और बचाव कार्य
यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना सोमवार देर रात करीब 11:50 बजे हुई। अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में अचानक बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत की बात यह रही कि वार्ड में भर्ती 28 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन इस अग्निकांड में तीन मासूमों की जान चली गई और 23 अन्य बच्चे घायल हो गए हैं।
BRS की प्रमुख मांगें: मुआवजे और सुरक्षा पर जोर
KTR ने इस मामले में सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके:
- आर्थिक सहायता: जिन परिवारों ने अपने मासूमों को खोया है, उन्हें सरकार की ओर से 25 लाख रुपये की राशि (Ex-gratia) तुरंत दी जानी चाहिए।
- बेहतर चिकित्सा: हादसे में घायल हुए 23 बच्चों को तत्काल और सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
- राज्यव्यापी निरीक्षण: आदिलाबाद के RIMS सहित पूरे तेलंगाना के सभी सरकारी अस्पतालों के चिल्ड्रन वार्ड और ICU का विशेषज्ञों द्वारा गहन निरीक्षण किया जाए।
KTR ने यह भी आरोप लगाया कि BRS के जिला नेताओं ने पहले भी RIMS अस्पताल की बदहाल स्थिति और वहां की समस्याओं के बारे में सरकार को बार-बार चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार इस ओर पूरी तरह से बेखबर रही। उन्होंने कहा कि बच्चों के वार्ड में सरकारी निगरानी की कमी और बुनियादी रखरखाव न होने के कारण ही यह हादसा हुआ है।