"पहले निष्पक्ष, अब धोखाधड़ी": चुनाव आयोग पर बरसे आदित्य ठाकरे, भारत को बताया 'पूर्व लोकतंत्र'

Prakriti Singh23 September 20263 min read1 viewMaharashtra
"पहले निष्पक्ष, अब धोखाधड़ी": चुनाव आयोग पर बरसे आदित्य ठाकरे, भारत को बताया 'पूर्व लोकतंत्र'

शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग अब एक निष्पक्ष संस्था के बजाय एक पक्षपाती इकाई के रूप में काम कर रहा है, जिससे करोड़ों भारतीयों के मतदान के अधिकार प्रभावित हुए हैं।

"दुनिया का सबसे बड़ा पूर्व लोकतंत्र बना भारत"

आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के माध्यम से आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग ने भारत को "दुनिया का सबसे बड़ा पूर्व लोकतंत्र" बना दिया है। ठाकरे का आरोप है कि आयोग एक विशेष राजनीतिक दल के एजेंट के रूप में काम कर रहा है और इसके माध्यम से लाखों नागरिकों के वोट देने के अधिकार को छीन लिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि आजादी के समय जिस सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के लिए संघर्ष किया गया था, उसे अब इस संस्था ने 'चुनिंदा मतदाता सूची' में बदल दिया है। ठाकरे ने कड़े शब्दों में कहा, "वह संस्था जो कभी निष्पक्ष थी, अब एक धोखाधड़ी है!"

SIR प्रक्रिया और आंतरिक मतभेद का मामला

यह पूरा विवाद 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर उपजा है। 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, आयोग के भीतर ही इस प्रक्रिया को लेकर काफी खींचतान देखी गई है।

  • रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान SIR प्रक्रिया और चुनावी रोल से संबंधित निर्णयों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
  • आरोप है कि इन निर्णयों के कारण लाखों मतदाताओं को उनके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित किया गया है।

विपक्षी नेताओं ने उठाई जांच और कार्रवाई की मांग

आदित्य ठाकरे के हमलों के बाद विपक्षी खेमे में भी हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है।

"मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को तुरंत हटाया जाना चाहिए और अदालत की निगरानी में जांच होनी चाहिए। एक राजनीतिक दल को लाभ पहुँचाने के लिए लाखों मतदाताओं को वंचित करना हमारे लोकतंत्र की नींव पर प्रहार है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए," अभिषेक बनर्जी ने X पर लिखा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।

वहीं, कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि यह खबर सही है, तो यह चुनाव आयोग की नींव को हिला देने वाली है। उन्होंने दो मुख्य बिंदुओं पर सवाल उठाए: 1. लिए गए निर्णय और 2. निर्णय लेने की प्रक्रिया

चुनाव आयोग का पक्ष और पुराना घटनाक्रम

दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन आरोपों को कमतर बताने की कोशिश की है। उनका कहना है कि SIR सहित चुनाव आयोग के सभी निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

गौरतलब है कि विपक्षी दल पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर चुके हैं। अप्रैल में, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बताया था कि 73 विपक्षी राज्यसभा सांसदों ने "सिद्ध कदाचार" के आधार पर हटाने के लिए एक नया नोटिस दिया था। हालांकि, पूर्व में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा ऐसे प्रस्तावों को खारिज किया जा चुका है।

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