अग्निवीरों को 2 साल की अतिरिक्त सेवा: पूर्व नौसेना प्रमुख का बड़ा बयान
पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने अग्निवीरों के कार्यकाल में 2 साल के विस्तार को सेना और युवाओं के लिए बड़ा लाभ बताया है।

पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी (सेवानिवृत्त) ने अग्निवीरों के लिए सरकार के हालिया फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। सरकार ने निर्णय लिया है कि 75 प्रतिशत अग्निवीरों को, जो पहले चार साल की सेवा के बाद बाहर होने वाले थे, उन्हें दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिया जाएगा। एडमिरल त्रिपाठी ने इस कदम को सशस्त्र बलों और स्वयं जवानों, दोनों के लिए एक अत्यंत सकारात्मक और लाभकारी निर्णय बताया है।
सेना के लिए प्रशिक्षित मैनपावर का बड़ा लाभ
एएनआई (ANI) से विशेष बातचीत के दौरान, एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि यह विस्तार सशस्त्र बलों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे सेना को प्रशिक्षित मैनपावर का लाभ मिलेगा, जो दो और वर्षों तक देश की सुरक्षा में अपनी सेवाएं दे सकेगी। इससे सेना की कार्यक्षमता और अनुभव का स्तर भी बना रहेगा।
युवाओं के लिए 'दिवाली गिफ्ट'
अग्निवीरों के भविष्य और उनकी चिंताओं पर बात करते हुए, पूर्व नौसेना प्रमुख ने इस फैसले को एक "दिवाली गिफ्ट" करार दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि अग्निवीरों के चार साल का कार्यकाल पूरा होने वाला था, इसलिए उनके मन में भविष्य को लेकर अनिश्चितता और घबराहट का माहौल था। इस विस्तार से न केवल उन्हें राहत मिलेगी, बल्कि उन्हें नागरिक जीवन में कदम रखने के लिए भी अधिक समय मिलेगा।
"सरकार ने अग्निवीरों के नागरिक जीवन में सुचारू संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही प्रावधान किए हैं, और यह विस्तार उन्हें और अधिक समय प्रदान करता है। यह सरकार का एक बहुत ही स्वागत योग्य निर्णय है।"
अनुशासन और कौशल जो जीवन भर साथ रहेंगे
उन अग्निवीरों के संबंध में जो सेना में निरंतर सेवा नहीं देना चाहते, एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि वे स्थापित नियमों के तहत सम्मानजनक विदाई ले सकते हैं और अन्य क्षेत्रों में देश की सेवा कर सकते हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वर्दी में सीखा गया अनुशासन और कौशल कभी व्यर्थ नहीं जाता।
उन्होंने उन प्रमुख गुणों का उल्लेख किया जो एक अग्निवीर अपने साथ लेकर चलता है:
- आत्म-अनुशासन: बिना अनुशासन के कड़ी मेहनत भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकती।
- टीम वर्क: एक टीम के रूप में मिलकर काम करने की क्षमता।
- राष्ट्र सेवा: देश के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और समर्पण।
एडमिरल के अनुसार, इस योजना का एक मुख्य उद्देश्य यह भी था कि जब ये युवा नागरिक समाज का हिस्सा बनें, तो वे सेना में सीखे गए सकारात्मक मूल्यों और अनुशासन को अन्य क्षेत्रों में भी लागू करें। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा इन सीखों का उपयोग अपने करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए करेंगे।