अखिलेश का बड़ा हमला: चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल, बोले- 'सपा वोटरों के नाम लिस्ट से हटाए गए'

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा उबाल देखने को मिला है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग (ECI) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि समाजवादी पार्टी के समर्थकों के नाम मतदाता सूची से "व्यवस्थित रूप से" हटा दिए गए हैं। लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आयोग की विश्वसनीयता पर सीधा हमला बोला।
"अब किस पर करें भरोसा?"
अखिलेश यादव ने हाल ही में आई एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग लोकतंत्र को मजबूत करने का दावा तो करता है, लेकिन उसके भीतर ही पारदर्शिता की कमी दिख रही है। उन्होंने कहा:
"जब चुनाव आयोग के भीतर ही ऐसी चीजें हो रही हैं, तो कोई उन पर भरोसा कैसे कर सकता है? पिछले 10 महीनों में विभिन्न अधिकारियों ने 14 बार पत्र लिखे हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी के मतदाताओं को मतदाता सूची से व्यवस्थित रूप से हटा दिया गया। हमने इस बात को आयोग के संज्ञान में लाया, लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।"
बुलडोजर राज और संवैधानिक मूल्यों पर प्रहार
पूर्व मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य में चल रही शासन व्यवस्था को 'मनमाना' बताते हुए कहा कि सरकार संवैधानिक मूल्यों को नष्ट कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि:
- सरकार हर व्यवस्था को ध्वस्त कर रही है।
- कानून और संविधान की परवाह किए बिना 'बुलडोजर राज' चलाया जा रहा है।
- यह सरकार आम लोगों की गरिमा और आत्म-सम्मान को कुचल रही है।
अयोध्या और राम मंदिर पर स्पष्ट स्टैंड
अयोध्या के मुद्दे पर अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी राम मंदिर के निर्माण के किसी भी प्रयास में बाधा नहीं बनना चाहती है। उन्होंने कहा, "हम कभी भी राम मंदिर के विकास में बाधा नहीं बनना चाहते थे और न ही भविष्य में चाहेंगे। हम अयोध्या का विकास भाजपा से कहीं बेहतर तरीके से करेंगे।"
हालांकि, उन्होंने भाजपा पर स्थानीय निवासियों को विस्थापित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई लोग सरयू नदी के पानी में खड़े होकर यह शपथ ले चुके हैं कि वे दोबारा भाजपा को वोट नहीं देंगे, क्योंकि उनके घरों और संपत्तियों को बुलडोजर से ढहा दिया गया है।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक जांच रिपोर्ट के बाद गरमाया है। रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित निर्णयों पर 10 महीनों के भीतर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन दावों को कमतर बताते हुए कहा है कि आयोग के