प्रयागराज लॉ यूनिवर्सिटी में जातिवाद के गंभीर आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए दो जांच समितियों के गठन के निर्देश

Prakriti Singh22 September 20262 min read5 viewsUttar Pradesh
प्रयागराज लॉ यूनिवर्सिटी में जातिवाद के गंभीर आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए दो जांच समितियों के गठन के निर्देश

प्रयागराज स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) में जाति आधारित भेदभाव के गंभीर आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दो अलग-अलग जांच समितियों के गठन का आदेश दिया है, जो इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करेंगी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला विश्वविद्यालय के एक पीएचडी शोध छात्र और पांचवें सेमेस्टर के एक छात्र द्वारा दायर की गई एक संयुक्त याचिका से सामने आया है। याचिका में बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। छात्रों का दावा है कि कानून विभाग के प्रमुख (HOD) और हॉस्टल वार्डन ने अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग किया है। याचिका के अनुसार, इन अधिकारियों ने जाति के आधार पर छात्रों को अपमानित करने और उनके खिलाफ प्रतिशोध लेने के लिए अपनी सत्ता का इस्तेमाल किया है।

मार्क्स के मूल्यांकन पर उठा बड़ा सवाल

याचिका में एक छात्र के अनुभव का जिक्र करते हुए बताया गया है कि 'कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ-I' विषय में सबसे अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद उसे आपत्तिजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। छात्र को गहरा संदेह है कि उसकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन उसकी जाति के आधार पर अत्यधिक सख्ती के साथ किया गया था। छात्र ने इस संबंध में 20 अगस्त, 2026 को कुलपति से भी शिकायत की थी, लेकिन आरोप है कि उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

हाईकोर्ट के सख्त निर्देश: अब ऐसे होगी जांच

जस्टिस विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि हालांकि अदालत ने अभी आरोपों की सत्यता पर कोई राय नहीं दी है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए एक निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। अदालत ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं:

  • मास्क्ड इवैल्यूएशन (Masked Evaluation): कुलपति को एक स्वतंत्र समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है जो छात्र की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन करेगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मूल्यांकन के दौरान छात्र की पहचान गुप्त रखी जाए और मूल मूल्यांकनकर्ता की इसमें कोई भूमिका न हो। इसकी रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर पेश करनी होगी।
  • न्यायिक जांच का आदेश: जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों की जांच के लिए स्मॉल कॉज कोर्ट की जज अर्चना सिंह-I और विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अरुण कुमार यादव को नियुक्त किया गया है। उन्हें अपनी जांच रिपोर्ट अदालत को सीलबंद लिफाफे में सौंपनी होगी।
  • प्रशासनिक कार्रवाई: अदालत ने आदेश दिया है कि प्रतिवादी संख्या छह को तत्काल प्रभाव से सभी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया जाए। साथ ही, जांच पूरी होने तक उन्हें छात्र के मूल्यांकन या किसी भी अनुशासनात्मक मामले से दूर रखा जाए।

विश्वविद्यालय की जवाबदेही तय होगी

हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय से यह स्पष्टीकरण भी मांगा है कि क्या वहां यूजीसी (UGC) के नियमों के तहत 'समान अवसर सेल' (Equal Opportunity Cell) और एससी/एसटी छात्रों के लिए 'शिकायत निवारण समिति' (Grievance Redressal Committee) कार्यरत है। अदालत ने निर्देश दिया है कि जांच के दौरान गवाहों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

इस मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर, 2026 को होगी।

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