यूपी पुलिस के हाफ एनकाउंटर पर हाईकोर्ट सख्त, सीबीआई जांच के दिए आदेश

Prakriti Singh20 August 20263 min read26 viewsUttar Pradesh
यूपी पुलिस के हाफ एनकाउंटर पर हाईकोर्ट सख्त, सीबीआई जांच के दिए आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस के एक हाफ एनकाउंटर पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंप दी है और जांच में दरोगा की निशानेबाजी के कौशल का परीक्षण भी किया जाएगा। यह मामला श्रावस्ती जिले का है जहां पुलिस ने अपहरण के एक आरोपी को पैर में गोली मारकर घायल करने के बाद गिरफ्तार किया था।

पुलिस की एफआईआर में कई विरोधाभास

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ की जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने आरोपी छोटकऊ उर्फ अलाउद्दीन की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो को जांच का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि पुलिस की एफआईआर में कई विरोधाभास साफ नजर आ रहे हैं और प्रतीत होता है कि थानाध्यक्ष ने घटना का झूठा ब्यौरा पेश किया है। कोर्ट ने सीबीआई को तीन महीने में अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने श्रावस्ती सत्र न्यायालय में अलाउद्दीन के खिलाफ चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी है और इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। श्रावस्ती के इकौना थाने में 9 मई, 2025 को अलाउद्दीन के खिलाफ सात साल की बच्ची के अपहरण के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद 12 मई, 2025 को थाने के तत्कालीन एसएचओ अश्विनी कुमार दुबे ने एक और एफआईआर दर्ज कराई जिसमें दावा किया गया कि आरोपी नेपाल भागने की फिराक में था और आत्मरक्षा में उस पर दो गोलियां चलाई गईं जो सीधे उसके दोनों पैरों में लगीं।

हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछे कई सवाल

इस मामले में पुलिस की ओर से दिए गए घटना के ब्यौरे पर हाईकोर्ट ने कई सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा कि वाहन में सवार 23 पुलिसकर्मियों से घिरे होने के बावजूद आरोपी ने फायरिंग की और इसमें एक भी पुलिसकर्मी घायल क्यों नहीं हुआ। रात के अंधेरे में एसएचओ ने हथियार लोड किए जाने की आवाज पर 15 मीटर की दूरी से दो गोलियां चलाईं और दोनों आरोपी के दोनों पैरों में कैसे लगीं। हाफ एनकाउंटर में पुलिस वालों को छर्रा तक नहीं लगता है और अभियुक्त को हमेशा घुटने के नीचे गोली कैसे लगती है। नौ एमएम की गोली के आकार और आरोपी के पैरों में आए घावों के विवरण में भारी अंतर क्यों दिख रहा है तथा पुलिस ने क्या झूठा इकबालिया बयान दर्ज किया। सात वर्षीय बच्ची के अपहरण से संबंधित मूल घटना के 61 मिनट के भीतर एफआईआर दर्ज हो गई थी, लेकिन उसमें दुष्कर्म, रक्त स्राव या बच्ची के घायल होने का कोई जिक्र क्यों नहीं था।

केस की सत्यता की जांच करने का आदेश

हाईकोर्ट ने अलाउद्दीन उर्फ छोटकऊ की ओर से दाखिल अपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा है कि पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर में कई गंभीर विसंगतियां हैं। अदालत ने सीबीआई से एसएचओ की निशानेबाजी के कौशल की जांच करने के लिए कहा है। उच्च न्यायालय ने सीबीआई को श्रावस्ती के इकौना थाने में बीएनएस की धारा 109 और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत दर्ज केस की सत्यता की जांच करने का निर्देश दिया है।

Share:

Comments

Leave a comment