"सर्वोच्च बलिदान": अमित शाह ने याद किया 1959 का हॉट स्प्रिंग्स हमला

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को दिल्ली में आयोजित 'राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस' परेड के दौरान लद्दाख के ऐतिहासिक 1959 Hot Springs incident को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के दुर्गम हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में 10 CRPF जवानों ने चीनी सेना के हमले का वीरतापूर्वक मुकाबला किया और देश की अखंडता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
वीरता की मिसाल: जब चीनी सेना से भिड़े थे जवान
अमित शाह ने उस संघर्ष की भयावहता और जवानों के साहस का वर्णन करते हुए कहा कि लद्दाख के ऊंचे और कठिन पहाड़ों पर जब यह संघर्ष शुरू हुआ, तो परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण थीं। उन्होंने कहा कि भले ही उस समय संघर्ष का परिणाम कठिन लग रहा था, लेकिन देश के उन वीर सपूतों ने पीछे हटने के बजाय लड़ना चुना।
"देश के उन अमर सपूतों ने यह संकल्प लिया कि हमारी जमीन का एक इंच भी विदेशी हाथों में नहीं जाने देंगे। उन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, और तभी से हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।"
पुलिस सेवा की चुनौतियां और त्योहारों पर ड्यूटी
गृह मंत्री ने पुलिस बल की कठिन जीवनशैली और उनके त्याग पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं में पुलिस सेवा सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण और मांग वाली है।
- जब देश के नागरिक रक्षाबंधन, होली, दिवाली या ईद जैसे त्योहार अपने परिवार के साथ मनाते हैं, तब पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं।
- अपने परिवार से दूर रहकर देश की आंतरिक सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक कल्याण के लिए समर्पित रहना एक महान कार्य है।
इस अवसर पर अमित शाह ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन सभी सुरक्षाकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2018 में पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर दिल्ली के चाणक्यपुरी में इस राष्ट्रीय पुलिस स्मारक को राष्ट्र को समर्पित किया था।