एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट: युवा प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 23 और 24 अगस्त 2026 को प्रकाशित एक डिजिटल जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि भारतीय सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गैरकानूनी और अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया। यह प्रदर्शन 20 जुलाई से 24 जुलाई 2026 के बीच नेशनल मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट (NET-UG पेपर) लीक होने के कारण शुरू हुए थे और बाद में इसमें बेरोजगारी के मुद्दे भी शामिल हो गए। एमनेस्टी की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और सेंट्रल रिजर्व पुलिस Force (CRPF) सहित सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर पेलेट-फायरिंग शॉटगन, ग्रेनेड, लाठी, आंसू गैस के गोले और इलेक्ट्रिक शॉक उपकरणों का इस्तेमाल किया।
जांच और कार्रवाई के आंकड़े
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बोर्ड चेयर आakar पटेल ने इस कार्रवाई को भीड़ नियंत्रण के नाम पर राज्य द्वारा समर्थित हिंसा बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। रिपोर्ट में बताया गया कि हथियारों का इस्तेमाल बिना किसी अनिवार्य पूर्व चेतावनी के किया गया, जो घरेलू पुलिसिंग दिशा-निर्देशों और अंतरराष्ट्रीय मानकों दोनों का उल्लंघन है। जांचकर्ताओं ने सीवान, बिहार में ऐसे मामलों की पुष्टि की जहां राज्य पुलिस अधिकारियों ने भीड़ पर AK-टाइप असॉल्ट राइफल से फायरिंग सहित घातक बल का इस्तेमाल किया। हालांकि कोई मौत दर्ज नहीं की गई, लेकिन सीवान में एक अधिकारी को बाद में निलंबित कर दिया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया। इसके विपरीत, एमनेस्टी ने नोट किया कि इन घटनाओं के एक महीने बाद भी दिल्ली में किसी भी अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं की गई है।
सरकार और अदालत की प्रतिक्रिया
मोदी सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी कार्रवाई पेशेवर थी और बल का प्रयोग केवल तब किया गया जब प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट की एक पिछली सुनवाई के दौरान, दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि छात्रों का रूप धरने वाले असामाजिक तत्व सुरक्षाकर्मियों को चोट पहुंचाने के लिए जिम्मेदार थे। इन तनावों के बीच, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेलेट से घायल हुए एक प्रदर्शनकारी के समर्थन में धरना दिया, और शुरुआती अशांति के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ। 20 अगस्त 2026 को, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस बलों और प्रदर्शनकारियों दोनों द्वारा की गई हिंसा की जांच के लिए एक पैनल का गठन किया।