अमरोहा में त्योहारी सीजन से पहले चीनी के दाम बढ़े, किसानों ने बकाया भुगतान पर 15 प्रतिशत ब्याज के लिए खोला मोर्चा

अमरोहा में पश्चिम उत्तर प्रदेश में त्योहारों से ठीक पहले चीनी की थोक कीमतों में करीब 32 प्रतिशत का तेज उछाल आया है। इससे आम उपभोक्ताओं और सरकार की चिंता बढ़ गई है। वहीं दूसरी ओर गन्ना किसानों ने अपने तीन दशकों के बकाया भुगतान पर 15 प्रतिशत ब्याज का पाई-पाई हिसाब मांगने के लिए मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के आह्वान पर जिला गन्ना अधिकारी कार्यालयों और सहकारी गन्ना विकास समितियों पर किसानों का आज से अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया है।
उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला
संगठन के संयोजक सरदार वी. एम. सिंह की अवमानना याचिका पर उच्च न्यायालय द्वारा 16 जुलाई को ऐतिहासिक आदेश सुनाया गया था। इसका हवाला देते हुए किसानों ने प्रशासन को एक विशेष मांगपत्र-प्रारूप सौंपना शुरू किया है। इस मांगपत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि उच्च न्यायालय की टिप्पणी के अनुसार जब किसान गन्ने की फसल उगाने के लिए बैंक और समितियों से लिए गए ऋण पर भारी ब्याज व पेनल्टी भरता है, तो चीनी मिलों द्वारा नियमानुसार 14 दिनों से अधिक विलंबित भुगतान पर देय ब्याज को किसी भी स्थिति में माफ नहीं किया जा सकता।
30 वर्षों के विलंबित भुगतान पर ब्याज की मांग
उच्च न्यायालय द्वारा गन्ना आयुक्त को गन्ना पेराई सत्र 1996-97 से लेकर 2025-26 तक के समूचे 30 वर्षों के विलंबित भुगतान पर 15 प्रतिशत की वार्षिक दर से ब्याज भुगतान कराने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है। इसी आलोक में किसानों ने अपनी गन्ना समिति, कृषक कोड, गांव और मोबाइल नंबर के विवरण के साथ औपचारिक प्रार्थना पत्र सौंपकर वर्षवार और किसानवार पारदर्शी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश संगठन प्रभारी उपेंद्र सिंह के अनुसार प्रशासनिक अधिकारी फिलहाल केवल पिछले तीन वर्षों का सीमित ब्यौरा दिखाकर औपचारिकता पूरी करने का प्रयास कर रहे हैं। किसान न्यायालय के आदेशानुसार पूरे तीन दशक का प्रमाणिक हिसाब लेकर ही दम लेंगे।
चीनी की बढ़ती कीमतें और सरकारी कार्रवाई
एक तरफ मुजफ्फरनगर जैसे प्रमुख थोक बाजारों में एम-ग्रेड चीनी के एक्स-फैक्ट्री भाव 4,400 रुपये से उछलकर 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुके हैं। खुदरा बाजारों में चीनी 58 से 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। किसानों का कहना है कि चीनी की इस आसमान छूती महंगाई का लाभ केवल मिल मालिकों और बिचौलियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा 1 अगस्त से 30 नवंबर तक व्यापारियों के लिए 4,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा लागू की गई है। 14 अगस्त को चीनी निदेशालय द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बावजूद बाजार की तेजी थम नहीं रही है।