अंकिता भंडारी मर्डर केस: 88 दिन में जांच पूरी, तीनों दोषियों को उम्रकैद

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। विशेष जांच दल (SIT) की कड़ी मेहनत और ठोस सबूतों के दम पर तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इस मामले में पुलिस की मुस्तैदी की भी सराहना की जा रही है, जिन्होंने घटना के महज 24 घंटों के भीतर ही आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया था।
SIT की जांच और 500 पन्नों की चार्जशीट
देहरादून में मीडिया को जानकारी देते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध और कानून व्यवस्था) वी. मुरुगेसन ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। जांच को पूरी तरह प्रभावी और निष्पक्ष बनाने के लिए एक महिला आईपीएस अधिकारी (DIG रैंक) को इस टीम का नेतृत्व सौंपा गया था।
SIT ने इस मामले में बेहद बारीकी से काम किया। टीम ने डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जांच के दौरान आरोपियों से गहन पूछताछ की गई और फॉरेंसिक रिपोर्ट के साथ-साथ गवाहों के बयानों का भी सूक्ष्म विश्लेषण किया गया।
कैसे मिली दोषियों को सजा?
जांच टीम की तत्परता का ही परिणाम था कि उन्होंने मात्र 88 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी कर ली। अदालत में पेश की गई चार्जशीट लगभग 500 पन्नों की थी, जिसमें अपराध से जुड़े तमाम पुख्ता सबूत शामिल थे।
SIT द्वारा जुटाए गए ठोस सबूतों और अभियोजन पक्ष की प्रभावी दलीलों के आधार पर, कोटद्वार के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने तीनों आरोपियों — पुल्किट आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार दिया और उन्हें कठोर कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई। वर्तमान में तीनों दोषी जेल में अपनी सजा काट रहे हैं।
क्या था पूरा मामला?
अंकिता भंडारी हत्याकांड 18 सितंबर, 2022 को हुआ था। अंकिता लक्ष्मण झूला पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले वंतारा रिसॉर्ट में कार्यरत थीं। इस दुखद घटना के बाद, 24 सितंबर, 2022 को उनका शव चिला नहर से बरामद किया गया था। इस घटना ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी और न्याय की मांग को लेकर काफी चर्चा हुई थी।