बिजली सब्सिडी विवाद: अनुपम ने सरकार से मांगा भ्रष्टाचार का हिसाब

बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली सब्सिडी छोड़ने की अपील पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा। अनुपम ने भ्रष्टाचार और पारदर्शिता पर पूछे तीखे सवाल।

Ghazala Saheb3 November 20262 min read0 viewsBihar
बिजली सब्सिडी विवाद: अनुपम ने सरकार से मांगा भ्रष्टाचार का हिसाब

बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा संपन्न और आयकर दाता नागरिकों से बिजली सब्सिडी छोड़ने की अपील के बाद अब कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनुपम ने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जनता से त्याग की अपेक्षा क्यों?

अनुपम ने कहा कि सरकार को नागरिकों से त्याग की उम्मीद करने से पहले अपने विभागों में पारदर्शिता लानी चाहिए और सरकारी धन के इस्तेमाल में जवाबदेही तय करनी चाहिए। मुख्यमंत्री का तर्क है कि बिहार सरकार बिजली सब्सिडी पर प्रतिवर्ष लगभग 23 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है और यदि संपन्न लोग इस लाभ को छोड़ दें, तो इस राशि का उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकता है।

हालांकि, अनुपम ने सवाल उठाया कि क्या सरकारी खजाने पर बढ़ते आर्थिक बोझ के लिए केवल नागरिकों को ही जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी धन का सही सदुपयोग सुनिश्चित करना और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

"जनता से त्याग मांगने से पहले सरकार को अपने तंत्र में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना चाहिए। विकास का रास्ता सार्वजनिक धन की रक्षा और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाकर ही निकलेगा।"

मुख्यमंत्री से पूछे गए 5 तीखे सवाल

अनुपम ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पांच प्रमुख बिंदुओं पर जवाब मांगा है, जो सरकार की नीतियों और प्रबंधन पर सवालिया निशान लगाते हैं:

  • नीतिगत जिम्मेदारी: क्या मुफ्त बिजली देना सरकार की नीतिगत जिम्मेदारी नहीं है, जिसे अब नागरिकों पर एक 'एहसान' के रूप में पेश किया जा रहा है?
  • खर्च का ब्योरा: बिजली सब्सिडी पर खर्च हो रहे 23 हजार करोड़ रुपये का विस्तृत हिसाब, लाभार्थियों की संख्या और उपभोक्ता श्रेणियों के अनुसार खर्च का विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?
  • बचत का उपयोग: संपन्न लोगों के सब्सिडी छोड़ने से होने वाली बचत को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क और ग्रामीण विकास पर किस अनुपात में और कब तक खर्च किया जाएगा?
  • भ्रष्टाचार की जांच: बिजली विभाग में कथित भ्रष्टाचार और सरकारी ठेकों में अनियमितताओं की जांच पूरी कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?
  • नुकसान की वसूली: सरकारी खजाने को हुए संभावित नुकसान की वसूली के लिए सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?

पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग

कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का निर्णय सरकार की नीतिगत जिम्मेदारी है और इसके वित्तीय प्रबंधन की जवाबदेही भी सरकार की ही है। उन्होंने मांग की है कि सरकार शिक्षा, खेल और ग्रामीण विकास की योजनाओं के लिए वास्तविक बजट, कार्ययोजना और समयबद्ध लक्ष्य सार्वजनिक करे।

अनुपम के अनुसार, संपन्न नागरिकों से स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने का आग्रह किया जा सकता है, लेकिन इसे सरकारी वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार से जुड़े सवालों के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस परिणाम और पारदर्शिता चाहती है।

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