आरा सदर अस्पताल में बेड की किल्लत, मरीज को बैठकर लगवानी पड़ी ड्रिप

आरा सदर अस्पताल में बेड की कमी के कारण एक महिला को वेटिंग एरिया में बैठकर ड्रिप लगवानी पड़ी। अस्पताल की बदहाली ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Ghazala Saheb28 October 20262 min read0 viewsBihar
आरा सदर अस्पताल में बेड की किल्लत, मरीज को बैठकर लगवानी पड़ी ड्रिप

बिहार के आरा सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का एक बेहद विचलित करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल में बेड की भारी कमी के चलते एक महिला मरीज को इमरजेंसी वार्ड में जगह नहीं मिल सकी, जिसके कारण उन्हें वेटिंग एरिया में ही बैठकर ड्रिप (IV ट्रीटमेंट) लगवानी पड़ी।

परिजनों को करनी पड़ी कड़ी मशक्कत

मिली जानकारी के अनुसार, धरहरा बाईपास की निवासी शिवरातो देवी को अस्पताल में बेड न मिलने के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें वेटिंग एरिया में बैठकर ही इलाज लेना पड़ा। इस दौरान उनकी बहू को लगातार खड़ी होकर ड्रिप की RL बोतल को अपने हाथ से पकड़कर रखना पड़ा ताकि मरीज को दवा मिल सके।

अस्पताल प्रबंधन की इस कथित लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने स्थानीय लोगों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बदहाली का पुराना इतिहास

आरा सदर अस्पताल में मरीजों की इस तरह की दुर्दशा कोई नई बात नहीं है। यह संस्थान लंबे समय से बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रहा है। इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहाँ:

  • मरीजों को फर्श पर लिटाकर इलाज करने की नौबत आई।
  • स्ट्रेचर की कमी के कारण मरीजों को संभालने में दिक्कत हुई।
  • बिजली कटौती की वजह से इमरजेंसी सेवाओं में व्यवधान पैदा हुआ।

सरकारी वादे और जमीनी हकीकत

एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने हाल ही में एक नई 100 बेड की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई के उद्घाटन और 50 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक के निर्माण की प्रतिबद्धता जताई है।

लेकिन इन घोषणाओं के बावजूद, अस्पताल के भीतर चल रही परिचालन संबंधी बाधाएं जस की तस बनी हुई हैं। पिछले कुछ महीनों में डायग्नोस्टिक टेस्ट की उपलब्धता को लेकर विवाद और मेडिकल स्टाफ की हड़ताल ने भी अस्पताल की सेवाओं को प्रभावित किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक अस्पताल प्रबंधन इन पुरानी और गंभीर समस्याओं का समाधान नहीं करता, तब तक नई सुविधाओं का लाभ धरातल पर नहीं दिखेगा।

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