अररिया: मजदूरों के प्रदर्शन के बाद एशियन थाई फूड्स फैक्ट्री अगले आदेश तक बंद

अररिया के फारबिसगंज स्थित बियाडा में एशियन थाई फूड्स पूर्वांचल प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री को शुक्रवार को अगले आदेश तक के लिए अस्थाई तौर पर बंद कर दिया गया है। प्रबंधन ने मुख्य गेट पर नोटिस चस्पा कर सभी कामगारों को इसकी सूचना दी है।
- मजदूरों ने 8 घंटे की ड्यूटी और वेतन के लिए किया प्रदर्शन।
- प्रबंधन ने तकनीकी खराबी का हवाला देकर फैक्ट्री बंद की।
- मजदूरों का आरोप है कि 12 घंटे काम कराकर 8 घंटे का भुगतान किया जाता है।
- भविष्य निधि (PF) की कटौती के बावजूद जानकारी नहीं मिल रही है।
- भाजपा नेता दिलीप पटेल ने मजदूरों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया।
मजदूरों की मांगें और प्रदर्शन
फैक्ट्री के कामगार बारह घंटे के बजाय आठ घंटे की ड्यूटी और काम के बदले सही मेहनताना पाने के लिए पिछले दो दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे। मजदूरों का आरोप है कि उनसे 12 घंटे काम कराया जाता है, लेकिन भुगतान केवल 8 घंटे का किया जाता है। साथ ही, उन्होंने बताया कि मजदूरी से भविष्य निधि के नाम पर पैसे काटे जाते हैं, लेकिन इसके बारे में कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दी जा रही है।
प्रबंधन का पक्ष और फैक्ट्री बंदी
फैक्ट्री मालिक ने बुधवार को बताया था कि कुछ कामगारों द्वारा अनुशासन तोड़ने पर पूछताछ करने पर मजदूरों ने प्रदर्शन शुरू किया। शुक्रवार को प्रबंधन ने गेट पर तकनीकी खराबी का नोटिस चिपकाकर फैक्ट्री को अगले आदेश तक बंद कर दिया और मजदूरों को अंदर जाने से रोक दिया। गुरुवार को काम नियमित रूप से हुआ था, लेकिन शुक्रवार को प्रवेश वर्जित होने के कारण मजदूर फिर से धरने पर बैठ गए।
राजनीतिक हस्तक्षेप और आश्वासन
सांसद प्रदीप कुमार सिंह के निर्देश पर भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिलाध्यक्ष दिलीप पटेल धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने मजदूरों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि जिला श्रम विभाग, जिला पदाधिकारी और विभागीय मंत्री से मिलकर मजदूरों को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता होगी।
इस धरने में सोनी देवी, गुड़िया कुमारी, सुनीता देवी, नीतू देवी, मंजू देवी, पूजा देवी, रूबी देवी, कविता देवी, कोमल देवी, शर्मिला देवी, ज्योति देवी, गोविंद कुमार, कामत, प्रहलाद कुमार, नीतीश पासवान, अनिल कामत, सुशील कुमार, आयुष कुमार, शिवराम कुमार, हेमंत कामत, फुच्चे सहनी, पूजा कुमारी, सीता देवी, अजय कामत, सरिता देवी, चांदनी देवी, चंद्रकला देवी, चंदा देवी, रानी देवी और सोनी देवी सहित दर्जनों मजदूर शामिल थे।