जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी बबली देवी, मिट्टी के बर्तन बेचकर बढ़ा रही हैं परिवार की आय

अररिया के मदनपुर निवासी बबली देवी नारी सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण हैं। जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने मिट्टी के बर्तन बनाना और बेचना शुरू किया, जिससे आज वे आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और आर्थिक तंगी
बबली देवी का परिवार पारंपरिक रूप से मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करता है। उनके परिवार में पति-पत्नी, तीन बेटियां और एक आठ साल का बेटा समेत कुल छह सदस्य हैं। पति की नियमित कमाई न होने के कारण परिवार की पूरी जिम्मेदारी बबली देवी के व्यवसाय पर है। कम आय के कारण पहले परिवार को पैसों की तंगी का सामना करना पड़ता था और बच्चों की पढ़ाई व घर चलाना बहुत मुश्किल था।
जीविका समूह से जुड़ने की कहानी
गांव की दूसरी जीविका दीदियों से प्रेरणा पाकर बबली देवी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह में आने के बाद उन्हें बचत करने, बैठकों में भाग लेने, बैंक के कामकाज और लोन की सुविधा के बारे में जानकारी मिली। जरूरत पड़ने पर उन्होंने समूह से लोन लिया और अपने पुराने पारिवारिक व्यवसाय को आगे बढ़ाया।
व्यवसाय में सुधार और बेहतर होती आय
जीविका से जुड़ने के बाद बबली देवी ने मिट्टी के बर्तन बनाने का काम बेहतर तरीके से शुरू किया। समूह से मिले साथ और पैसों की मदद से उन्होंने कच्चा माल आसानी से उपलब्ध किया और उत्पादन बढ़ाया। आज उनकी महीने की कमाई करीब 8 हजार रुपये हो गई है, जिससे परिवार की आर्थिक हालत पहले से काफी अच्छी है। वे धीरे-धीरे अपना लोन भी चुका रही हैं और बच्चों की पढ़ाई तथा घर के खर्चों को अच्छे से संभाल पा रही हैं। समूह से जुड़ने के बाद उनके अंदर आत्मविश्वास भी बढ़ा है।