अररिया में बाल विवाह की कोशिश नाकाम, प्रशासन और NGO ने दिखाया दम

बिहार के अररिया जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां प्रशासन, एनजीओ और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयास से एक नाबालिग लड़की की शादी को होने से रोक लिया गया। भरगामा प्रखंड के रघुनाथपुर उत्तर में हुई इस घटना ने समाज में जागरूकता और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।
NGO की सूचना पर प्रशासन हुआ अलर्ट
मिली जानकारी के अनुसार, रघुनाथपुर उत्तर वार्ड संख्या आठ में एक नाबालिग बच्ची का विवाह उसी वार्ड के रहने वाले भगवान ऋषिदेव के साथ तय किया गया था। इस बाल विवाह की गुप्त सूचना जागरण कल्याण भारती नामक एनजीओ के सदस्य संजय कुमार को मिली। सूचना मिलते ही एनजीओ ने तुरंत फारबिसगंज एसडीओ अभय कुमार तिवारी, भरगामा बीडीओ और स्थानीय थानाध्यक्ष को मामले की गंभीरता से अवगत कराया।
मुखिया की सूझबूझ और कानूनी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीओ और एनजीओ ने रघुनाथपुर उत्तर पंचायत की बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति के अध्यक्ष सह मुखिया को भी सूचित किया। मुखिया ने बिना समय गंवाए समिति की एक आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में निम्नलिखित कदम उठाए गए:
- लड़का और लड़की, दोनों पक्षों के परिजनों को तुरंत बुलाया गया।
- उन्हें बाल विवाह से जुड़े कानूनी परिणामों और सजा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
- मौके पर मौजूद अधिकारियों और एनजीओ प्रतिनिधियों की उपस्थिति में दोनों पक्षों के बीच चर्चा की गई।
अंततः, एक शांतिपूर्ण समाधान निकालते हुए एक हजार रुपये के गैर-न्यायिक कागजात पर एक समझौता तैयार किया गया। इस समझौते पर दोनों पक्षों के सदस्यों, एनजीओ प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए, जिसके बाद शादी की योजना को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया।
पुलिस में दर्ज हुआ मामला
इस पूरी घटना की सूचना अररिया जिलाधिकारी (DM), बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक, आईसीडीएस के डीपीओ और भरगामा बीडीओ सहित अन्य उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। कानूनी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए भरगामा थाना में इस संबंध में सनहा संख्या 0005/2026 दर्ज कर लिया गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों, एनजीओ और जनप्रतिनिधियों की इस त्वरित और समन्वित कार्रवाई ने न केवल एक बच्ची के भविष्य को बचाया, बल्कि समाज को यह कड़ा संदेश भी दिया कि बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है।