नशामुक्त बिहार अभियान: अररिया में 'गांव का संकल्प' से नशे पर प्रहार
अररिया प्रशासन ने 'नशामुक्त बिहार अभियान' के तहत 'गांव का संकल्प' शुरू किया है। डीएम विनोद दुहन ने गांवों में जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए हैं।

अररिया जिला प्रशासन ने नशामुक्त बिहार अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए कमर कस ली है। जिले को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के उद्देश्य से प्रशासन ने अब गांव-गांव तक जागरूकता फैलाने की रणनीति तैयार की है।
'गांव का संकल्प' से बदलेगी ग्रामीण तस्वीर
जिलाधिकारी विनोद दुहन ने कलेक्ट्रेट के आत्मन ऑडिटोरियम में एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में अभियान के दूसरे चरण की रूपरेखा तैयार की गई, जिसका विषय 'गांव का संकल्प' रखा गया है। यह विशेष अभियान 1 नवंबर से 7 नवंबर तक चलाया जाएगा।
"नशा विनाश की जड़ है; इसे जीवन से हर पल उखाड़ फेंकें। स्वस्थ जीवन, सुखी परिवार, यही है नशामुक्त बिहार।"
जागरूकता के लिए प्रशासन का मास्टर प्लान
नशे के खिलाफ इस जंग को केवल कागजों तक सीमित न रखकर, जिलाधिकारी ने इसे हर घर तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
- पंचायत भवनों पर संदेश: जिले की सभी ग्राम पंचायत इमारतों पर शराबबंदी और नशामुक्ति से जुड़े नारे प्रमुखता से लिखे जाएंगे।
- प्रचार सामग्री का प्रसार: गांवों में संदेश पहुंचाने के लिए बैनर, पोस्टर और विशेष जागरूकता वाहनों का उपयोग किया जाएगा।
- नुक्कड़ नाटक: मद्य निषेध, उत्पाद एवं पंजीयन विभाग के सहयोग से नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को नशे के खतरों के प्रति सचेत किया जाएगा।
जीविका दीदियां और सामाजिक संस्थाएं बनेंगी ढाल
इस अभियान की सफलता के लिए प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। जिलाधिकारी ने जीविका दीदियों को इस मुहिम का नेतृत्व सौंपते हुए निर्देश दिया है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों और एक स्वस्थ जीवनशैली के लाभों के बारे में जागरूक करें।
इसके साथ ही, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यापीठ जैसी संस्थाओं के सहयोग से भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। डीएम ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया है ताकि 'गांव का संकल्प' अभियान के माध्यम से हर ग्रामीण इस मुहिम का हिस्सा बन सके।