अररिया: ओडीएफ स्थिरता और बाढ़ से निपटने के लिए नई स्वच्छता तकनीक

अररिया के डीआरडीए सभागार में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य विषय अररिया ओडीएफ स्थिरता एवं जलवायु-संवेदी वाश (WASH) तकनीकी रहा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जिले में स्वच्छता के स्तर को और अधिक मजबूत बनाना और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना है।
ओडीएफ स्थिति को बनाए रखना बड़ी चुनौती
यूनिसेफ के वाश अधिकारी सुधाकर रेड्डी ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत अररिया ने घरेलू शौचालयों की उपलब्धता और खुले में शौच से मुक्ति की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि, अब असली चुनौती इन उपलब्धियों को लंबे समय तक बनाए रखने की है। उन्होंने जोर दिया कि स्वच्छता परिसंपत्तियों का उचित रखरखाव और स्वच्छता सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बाढ़ और जलवायु परिवर्तन का बढ़ता खतरा
अररिया जिला अक्सर बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में रहता है। ऐसी परिस्थितियों में पारंपरिक स्वच्छता प्रणालियां अक्सर विफल हो जाती हैं और विभिन्न समस्याएं उत्पन्न करती हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण इन जोखिमों के बढ़ने की संभावना को देखते हुए, अब जिले में जलवायु-संवेदी एवं आपदा-रोधी वाश तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
यूनिसेफ के राज्य सलाहकार निकेत झा ने सतत विकास लक्ष्य-6 (SDG-6) के तहत स्वच्छ जल और स्वच्छता संबंधी लक्ष्यों को प्राप्त करने के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे स्वच्छता प्रणालियों की अनुकूलन क्षमता बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और टिकाऊ स्वच्छता सेवाएं सुनिश्चित की जा सकती हैं।
कार्यशाला में अधिकारियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम का शुभारंभ डीडीसी रोजी कुमारी और डीआरडीए निदेशक द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण विभागों और संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें शामिल थे:
- लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कनीय अभियंता
- सभी प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO)
- जिला समन्वयक और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के प्रखंड समन्वयक
- जीविका के जिला प्रबंधक और प्रखंड परियोजना प्रबंधक
- पंचायती राज संस्था के पदाधिकारी
- यूनिसेफ और जीपीएसभीएस के प्रतिनिधि