अररिया में कॉकरोच मास्क पहनकर 'जिंदा लाश मार्च', एसआईआर का विरोध

बिहार के अररिया में शनिवार को एक बेहद अनोखा और उग्र प्रदर्शन देखने को मिला। एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के विरोध में सैकड़ों की संख्या में छात्र, युवा, किसान, मजदूर और सामाजिक कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। इस प्रदर्शन की सबसे चौंकाने वाली तस्वीर तब देखने को मिली जब प्रदर्शनकारियों ने अपने चेहरों पर कॉकरोच के मुखौटे लगाकर 'जिंदा लाश मार्च' निकाला।
कागजों में 'जिंदा' को 'मृत' बताने का आरोप
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर नागरिकों के साथ बड़ा अन्याय किया जा रहा है। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा यह है कि इस प्रक्रिया के जरिए जीवित नागरिकों को कागजों में मृत घोषित किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया जारी रही, तो कई योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे, जिससे उनका लोकतांत्रिक अधिकार छिन जाएगा।
चांदनी चौक से कचहरी तक गूंजे नारे
यह विरोध प्रदर्शन 'यूथ की बात' के बैनर तले आयोजित किया गया था, जिसे जन जागरण शक्ति संगठन और एक वामपंथी दल का समर्थन प्राप्त था। मार्च अररिया के चांदनी चौक से शुरू होकर सुभाष चौक होते हुए कचहरी परिसर स्थित धरना स्थल तक पहुंचा। पूरे रास्ते प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए जमकर नारेबाजी की।
प्रमुख मांगें और नेतृत्व
कचहरी परिसर में आयोजित सभा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। प्रदर्शनकारियों ने निम्नलिखित मांगें रखीं:
- एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपना इस्तीफा दें।
- मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व सब्यसाची सेन, नवाज हसन और सुनील कुमार ने किया। जन जागरण शक्ति संगठन की मांडवी देवी ने चेतावनी देते हुए कहा कि लोकतंत्र पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, नवाज हसन ने कहा कि लोकतंत्र को राजतंत्र में बदलने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका विरोध जारी रहेगा।