किशनगंज में सेना के दो नए कैंप की तैयारी, जानें कहाँ बनेंगे

सीमावर्ती किशनगंज में सेना की मौजूदगी बढ़ाने के लिए दो नए स्थायी कैंप बनाने की योजना है। जानें सरायकुड़ी और भेलागुड़ी में क्या है पूरा मामला।

Ghazala Saheb31 October 20262 min read0 viewsBihar
किशनगंज में सेना के दो नए कैंप की तैयारी, जानें कहाँ बनेंगे

सीमावर्ती किशनगंज जिले में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। जिले की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए भारतीय सेना की मौजूदगी बढ़ाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, किशनगंज में दो अलग-अलग स्थानों पर सेना के स्थायी कैंप स्थापित करने की तैयारी चल रही है।

भेलागुड़ी और सरायकुड़ी पर टिकी नजरें

प्रस्तावित योजना के तहत, ठाकुरगंज प्रखंड के भेलागुड़ी में आर्मी कैंप की स्थापना लगभग तय मानी जा रही है। वहीं, दूसरे कैंप के लिए स्थान को लेकर भी नए सिरे से विचार किया जा रहा है। पहले सकोर-नटुआपाड़ा में कैंप बनाने की चर्चा थी, लेकिन अब उसकी जगह ठाकुरगंज प्रखंड के सरायकुड़ी का नाम सामने आया है।

सरायकुड़ी में प्रस्तावित कैंप के लिए लगभग 190 एकड़ जमीन पर विचार किया जा रहा है। इस स्थान को चुनने के पीछे कई महत्वपूर्ण भौगोलिक और रणनीतिक कारण हैं:

  • यह इलाका किशनगंज-बहादुरगंज मुख्य मार्ग पर स्थित है।
  • यहाँ से राष्ट्रीय राजमार्ग NH-327E भी काफी नजदीक है।
  • सरायकुड़ी कोचाधामन और बहादुरगंज प्रखंड की सीमा के बेहद करीब है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों तक आवाजाही और पहुंच आसान होगी।

किसानों के विरोध के बाद बदला गया स्थान

गौरतलब है कि पहले बहादुरगंज और कोचाधामन अंचल की सीमा से सटे सकोर, सतभीट्टा और नटुआपाड़ा मौजा में 200 एकड़ से अधिक जमीन पर सेना कैंप स्थापित करने का प्रस्ताव चर्चा में था। लेकिन, इस प्रस्ताव को किसानों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।

किसानों का तर्क था कि प्रस्तावित जमीन का एक बड़ा हिस्सा अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि है, जिस पर सैकड़ों परिवारों की आजीविका टिकी हुई है। भूमि अधिग्रहण से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।

इस मुद्दे को लेकर बहादुरगंज के AIMIM विधायक तौसीफ आलम ने भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट किया था कि उनका विरोध राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ नहीं, बल्कि किसानों की उपजाऊ जमीन और उनकी आजीविका को बचाने के उद्देश्य से है।

अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार

हालांकि, सरायकुड़ी में 190 एकड़ जमीन और भेलागुड़ी में कैंप स्थापना को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना या प्रशासनिक घोषणा सामने नहीं आई है। यदि ये दोनों कैंप बनकर तैयार हो जाते हैं, तो सीमावर्ती किशनगंज की सामरिक अहमियत और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा।

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