वैश्विक संकट के बीच भारत में नहीं आएगा खाद्य संकट: पनगढ़िया

Ghazala Saheb3 October 20262 min read0 viewsBihar
वैश्विक संकट के बीच भारत में नहीं आएगा खाद्य संकट: पनगढ़िया

दुनिया भर में चल रहे संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने कहा है कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत को किसी बड़े खाद्य या उर्वरक संकट का सामना करने की संभावना नहीं है।

नई दिल्ली में आयोजित 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन के दौरान पनगढ़िया ने भारत की आर्थिक मजबूती पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में ऊर्जा झटकों को झेलने और उर्वरक आपूर्ति को मजबूत करने की अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है।

उर्वरक और ऊर्जा संकट से निपटने में सक्षम भारत

हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चेतावनी दी थी कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों के कारण वैश्विक खाद्य संकट और उर्वरक की कमी का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, पनगढ़िया ने इस पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि भारत इसके लिए तैयार है।

“अगर हम पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान अपने हालिया अनुभव को देखें और देखें कि हम ऊर्जा क्षेत्र को कितनी अच्छी तरह संभाल पाए हैं, तो मुझे नहीं लगता कि हमें किसी भी चीज से बहुत गंभीरता से डरने की जरूरत है।”

उन्होंने आगे बताया कि भारत की उर्वरक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। घरेलू संयंत्रों के फिर से शुरू होने और अन्य देशों से आयात की सुविधा के कारण आपूर्ति सुचारू बनी रहेगी। सरकार ने भी घरेलू उत्पादन और अग्रिम स्टॉक के माध्यम से पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है।

खाद्य निर्यात में बढ़ सकती है भारत की भूमिका

खाद्य आपूर्ति के संबंध में पनगढ़िया ने एक महत्वपूर्ण पहलू की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन जैसे प्रमुख उत्पादकों से आपूर्ति बाधित होने पर भारत के कृषि उत्पादों की मांग वैश्विक बाजार में बढ़ सकती है।

प्रमुख बातें:

  • यूक्रेन युद्ध से वैश्विक आपूर्ति कम होने पर भारतीय खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है।
  • यदि वैश्विक कीमतों में उछाल आता है, तो भारतीय निर्यातकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
  • भारत एक प्रमुख कृषि निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है।

मजबूत होती अर्थव्यवस्था और विकास की राह

पनगढ़िया ने भारत के व्यापक आर्थिक विकास पर भी उत्साहजनक टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में वार्षिक विकास दर कम से कम 7 प्रतिशत बनी रहेगी।

उन्होंने कहा कि विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र में हो रहा सुधार अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत ही उत्साहजनक संकेत है। हालांकि उन्होंने माना कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें विकास को कुछ हद तक प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन अन्य आर्थिक कारक भारत के पक्ष में हैं।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि रुपये की गिरावट भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में मदद कर रही है। पनगढ़िया के अनुसार, भारत ने पहले भी कोविड महामारी और बैंकिंग प्रणाली के तनाव जैसे बड़े झटकों को सफलतापूर्वक झेला है, इसलिए वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भी भारत सुरक्षित है।

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