अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी: 70 नहीं, 105 बार कैमरे में कैद हुई वारदात! जयराम रमेश ने SIT को घेरा

Prakriti Singh22 September 20262 min read4 viewsUttar Pradesh
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी: 70 नहीं, 105 बार कैमरे में कैद हुई वारदात! जयराम रमेश ने SIT को घेरा

अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे की चोरी के मामले ने अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद जयराम रमेश ने इस मामले में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मंदिर के सीसीटीवी कैमरों में चोरी की घटनाएं केवल 70 बार नहीं, बल्कि कम से कम 105 बार दर्ज की गई हैं।

CCTV फुटेज ने खोली पोल: 105 बार हुई चोरी

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जांच में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि सीसीटीवी फुटेज में चोरी की घटनाएं 105 बार देखी गई हैं, जिसे अब कोई भी नकार नहीं सकता। उन्होंने इस घटना को देश का सबसे शर्मनाक मामला करार दिया और कहा कि यह करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ किया गया धोखा है।

25 सितंबर की डेडलाइन और चार्जशीट का पेच

मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की तीन महीने की अवधि समाप्त होने में अब मात्र तीन दिन बचे हैं। रमेश ने इस देरी पर गहरी चिंता जताते हुए कहा:

  • चार्जशीट में देरी: तीन महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।
  • जमानत का डर: यदि 25 सितंबर तक चार्जशीट पेश नहीं की गई, तो मुख्य साजिशकर्ताओं को बचाने के लिए छोटे आरोपियों को जमानत दिलाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
  • जनता का अविश्वास: रमेश के अनुसार, जनता को SIT और सरकारी जांच पर भरोसा नहीं है क्योंकि उन्हें संदेह है कि "बड़े मगरमच्छों" (मुख्य दोषियों) को बचाने की कोशिश की जा रही है।

प्रधानमंत्री की चुप्पी पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी कड़े प्रहार किए हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन का श्रेय लेते रहे हैं, उन्हें करोड़ों भक्तों की आस्था और चढ़ावे की चोरी की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।

"प्रधानमंत्री जी, याद रखें: राष्ट्र की आस्था से जुड़े इस गंभीर मामले पर आपकी चुप्पी का जवाब आपको देना होगा।"

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

जयराम रमेश ने इस मामले में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया है:

  1. पूरे सिस्टम का एक फोरेंसिक ऑडिट किया जाए।
  2. जांच पूरी तरह से पारदर्शी हो ताकि असली दोषियों को बचाया न जा सके।
  3. मुख्य साजिशकर्ताओं की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
  4. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच सुनिश्चित की जाए।
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