बेतिया: मुसलाधार बारिश और तेज हवा ने धान की फसल को किया बर्बाद
बेतिया में मुसलाधार बारिश और तेज हवाओं से धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के बाद अब किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

पश्चिम चंपारण के बेतिया क्षेत्र में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां गंडक नदी की बाढ़ ने तबाही मचाई थी, वहीं अब लगातार हो रही मुसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की बची-कुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी फसल हो या कटाई के बाद रखे गए धान के ढेर, सब कुछ बर्बाद होता देख किसानों के सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
बाढ़ के बाद अब कुदरत की दोहरी मार
खड्डा कुंजलही गांव के किसानों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वे पिछले काफी समय से गंडक नदी के उफान और बाढ़ के कहर को झेल रहे थे। दियारा के इलाकों में बाढ़ के पानी ने चंपारण तटबंध के किनारे और नदी के किनारों पर लगाई गई धान और गन्ने की फसल को पहले ही डुबोकर नष्ट कर दिया था। अब पिछले दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने स्थिति को और भी भयावह बना दिया है।
स्थानीय किसान वीर पासवान, राजेश पासवान, दशरथ पासवान, शेख जोहा और अफरोज नैयर ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा से धान का भारी नुकसान हुआ है। खेतों में खड़ी फसलें हवा के दबाव से गिर गई हैं, वहीं जो धान कटकर सुरक्षित रखा गया था, वह भी बारिश के पानी की चपेट में आकर खराब हो रहा है।
बेबसी में आंसू बहा रहे अन्नदाता
प्राकृतिक आपदा की इस दोहरी मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। महीनों की कड़ी मेहनत और भारी निवेश के बाद जब फसल इस तरह बर्बाद होती है, तो किसान खुद को बेहद असहाय महसूस कर रहे हैं। खेतों में तबाही का मंजर देखकर किसान अपनी बेबसी पर आंसू बहाने को मजबूर हैं। किसानों को डर है कि इस नुकसान की भरपाई करना उनके लिए नामुमकिन होगा।