भागलपुर शिक्षा विभाग में करोड़ों का महाघोटाला! CBI जांच की मांग

बिहार के भागलपुर जिले से भ्रष्टाचार का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के शिक्षा विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है और अब इसकी जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग उठ रही है।
डॉ. चक्रपाणि हिमांशु ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
बिहार सरकार के बाल श्रमिक आयोग के पूर्व अध्यक्ष (समतुल्य कैबिनेट मंत्री) डॉ. चक्रपाणि हिमांशु ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने बुधवार को सूबे के मुख्यमंत्री, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, सीबीआई (CBI), भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB), प्रमंडलीय आयुक्त और भागलपुर के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
डॉ. हिमांशु ने अपने पत्र में भागलपुर के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक और जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की चल-अचल संपत्ति की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा से कराई जाए।
घोटाले के मुख्य बिंदु: फर्जी शिक्षक और वेतन में हेराफेरी
डॉ. चक्रपाणि हिमांशु द्वारा उठाए गए बिंदुओं ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्र में निम्नलिखित मुख्य अनियमितताओं का जिक्र किया गया है:
- फर्जी शिक्षिका का मामला: तनुश्री नामक एक फर्जी शिक्षिका के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया है।
- वेतन में धांधली: वर्ष 2006 से नियोजित शिक्षकों के वेतन और उनके बकाये के भुगतान में भारी वित्तीय अनियमितता बरती गई है।
- फर्जी शिक्षकों को संरक्षण: आरोप है कि साल 2006 से ही फर्जी शिक्षकों की बहाली पर कार्रवाई करने के बजाय, उनसे मोटी रकम लेकर उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है।
स्थानांतरण के नाम पर अवैध वसूली का खेल
भ्रष्टाचार का यह जाल केवल वेतन तक ही सीमित नहीं है। डॉ. हिमांशु ने आरोप लगाया है कि शिक्षकों के स्थानांतरण (Transfer) और उन्हें विद्यालय प्रभारी बनाने के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध वसूली की जा रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों का एक सिंडिकेट सक्रिय है जो इस अवैध वसूली के जरिए करोड़ों रुपये कमा रहा है।
"इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने के लिए तत्काल प्रभाव से जांच बैठाई जानी चाहिए और दोषी अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।"
शिक्षा विभाग में हुए इस बड़े खुलासे के बाद अब सबकी नजरें सरकार और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि क्या इस भ्रष्ट सिंडिकेट पर लगाम कसने के लिए प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं।