चुनाव आयोग में 'बड़ी साजिश'? 14 बार कमिश्नरों की बात अनसुनी, बिहार समेत कई राज्यों में लाखों वोट गायब!

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र की गरिमा को ताक पर रखकर 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) की प्रक्रिया को बेहद गुप्त तरीके से अंजाम दिया है। हरिप्रसाद का दावा है कि इस प्रक्रिया में अन्य दो चुनाव आयुक्तों की असहमति को बार-बार दरकिनार किया गया है।
10 महीनों में 14 बार अन्य आयुक्तों की बात को किया अनसुना
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हरिप्रसाद ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 महीनों के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 14 बार अन्य दो चुनाव आयुक्तों के विरोध के बावजूद एकतरफा फैसले लिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जहाँ चुनाव आयोग का काम लोकतंत्र की रक्षा करना है, वहीं यहाँ एक विशेष राजनीतिक दल और नेता को फायदा पहुँचाने के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही पलट दिया गया है।
"ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो आयुक्तों की सहमति के बिना निर्णय लिए हैं और विरोध के बावजूद फॉर्म 6 में बदलाव किए गए हैं। यह लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ एक खुला हमला है।"
वोटों की भारी कटौती: बिहार, बंगाल और कर्नाटक में मची खलबली
हरिप्रसाद ने आंकड़ों के जरिए बताया कि कैसे अलग-अलग राज्यों में मतदाताओं की सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। उनके अनुसार, वोटों की यह कटौती किसी त्रुटि का परिणाम नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति लगती है:
- बिहार: यहाँ से लगभग 63 लाख वोट हटाए गए हैं।
- पश्चिम बंगाल: यहाँ से 91 लाख वोट कम किए गए हैं।
- कर्नाटक: यहाँ स्थिति और भी गंभीर है, जहाँ 1.07 करोड़ वोट हटाए जाने का दावा किया गया है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी ने फरवरी 2025 में ही इस संबंध में चुनाव आयोग को पत्र लिखा था, लेकिन आयोग ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करने के बजाय एकतरफा निर्णय लेना जारी रखा।
दलितों और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का आरोप
कांग्रेस नेता ने एक बेहद संवेदनशील मुद्दा उठाते हुए कहा कि हटाए गए मतदाताओं में से बहुसंख्यक हिस्सा अल्पसंख्यकों और दलित समुदायों का है। उन्होंने दावा किया कि गरीबों के मताधिकार को छीनने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कर्नाटक के बाबलेश्वर और हुबली-धारवाड़ जैसे क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये गलतियाँ मतदाता सूची में नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में हैं।
हरिप्रसाद ने आगे कहा कि उनके पास 65,000 ऐसे हटाए गए वोटों के आवेदन हैं, जिनमें किसी के हस्ताक्षर तक नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जाते हैं, तो भाजपा के नेता आकर उनका बचाव करने लगते हैं, जबकि आयोग को खुद जवाब देना चाहिए।
इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग: सड़कों पर उतरने की तैयारी
इस पूरे मामले को 'देशद्रोह' करार देते हुए हरिप्रसाद ने मुख्य चुनाव आयुक्त के तत्काल इस्तीफे और उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने कहा कि:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत पद छोड़ना चाहिए।
- इस असंवैधानिक कार्य के लिए उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए।
- इस पूरे मामले की एक स्वतंत्र और व्यापक जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर आंदोलन करने का निर्णय लिया है। कल फ्रीडम पार्क में एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें अन्य राजनीतिक दलों को भी आमंत्रित किया गया है। हरिप्रसाद ने चेतावनी दी कि यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले दिनों में चुनाव का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। इसके दूसरे चरण में