बक्सर से भागलपुर तक 400 किमी का इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, बिहार में मचेगी धूम
बिहार सरकार बक्सर से भागलपुर तक 400 किमी लंबा औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करेगी। गंगा की गाद से सड़कें और टाउनशिप बनाने की बड़ी तैयारी।

बिहार के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। बक्सर से लेकर भागलपुर तक लगभग 400 किलोमीटर लंबा एक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से न केवल राज्य के बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव आएगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई ऊंचाइयां मिलेंगी।
गंगा की गाद से तैयार होगा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
इस विशाल परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे गंगा नदी के प्रबंधन और विकास के साथ जोड़ा गया है। सरकार की योजना गंगा नदी से गाद (सिल्ट) निकालने की है, जिसका उपयोग निर्माण कार्यों में किया जाएगा।
- सड़क और तटबंध: नदी से निकाली गई गाद का उपयोग सड़क निर्माण और नदी के दोनों किनारों पर मजबूत तटबंध बनाने के लिए किया जाएगा।
- नदी किनारे टाउनशिप: इस कॉरिडोर के साथ-साथ गंगा के किनारे आधुनिक टाउनशिप विकसित करने की योजना है।
- बाढ़ का समाधान: गाद निकालने की इस प्रक्रिया से राज्य में बाढ़ प्रबंधन के लिए एक स्थायी समाधान खोजने का प्रयास किया जाएगा।
सम्राट चौधरी ने बताया विकास का विजन
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंगा जल संधि और बिहार में जल सुरक्षा पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इन योजनाओं का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने राज्य की चुनौतियों को अवसरों में बदलने की बात कही।
"बिहार की बढ़ती जनसंख्या और उसकी नदियाँ हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी ताकत हैं। गंगा जल समझौता हमारी प्राथमिकता है ताकि सिंचाई, उद्योगों और पीने के पानी की जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।" — सम्राट चौधरी
NHAI के साथ बड़ी डील और एरियल सर्वे की तैयारी
परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए बिहार सरकार 12 दिसंबर को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने जा रही है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सड़क निर्माण में गंगा की गाद का वैज्ञानिक और प्रभावी ढंग से उपयोग करना है।
परियोजना के सटीक क्रियान्वयन के लिए गंगा नदी का एक एरियल सर्वे (Aerial Survey) भी किया जाएगा। गौरतलब है कि बिहार सरकार ने पहले ही एक राज्य स्तरीय सिल्ट पॉलिसी तैयार कर ली है और अब सरकार इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के लिए भी प्रयास कर रही है।