बिहार में दो नए एयरपोर्ट्स की तैयारी: 7,373 एकड़ जमीन अधिग्रहण शुरू

Ghazala Saheb13 October 20263 min read0 viewsBihar
बिहार में दो नए एयरपोर्ट्स की तैयारी: 7,373 एकड़ जमीन अधिग्रहण शुरू

बिहार के हवाई सफर का चेहरा बदलने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सोनपुर और भागलपुर-मुंगेर में प्रस्तावित दो नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी है। इस महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए कुल 7,373 एकड़ जमीन की जरूरत होगी, जिससे राज्य के हजारों परिवारों और भूमिधारकों का जीवन प्रभावित होने वाला है।

दो बड़े एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स का पूरा खाका

इस परियोजना के तहत दो अलग-अलग क्षेत्रों में हवाई सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा:

  • सोनपुर एयरपोर्ट: सारण जिले में प्रस्तावित इस एयरपोर्ट के लिए 4,228 एकड़ जमीन की पहचान की गई है। इस प्रक्रिया से लगभग 14,224 निवासियों पर असर पड़ेगा।
  • भागलपुर-मुंगेर एयरपोर्ट: इस प्रोजेक्ट के लिए 3,145 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। यह विस्तार भागलपुर सदर, सुल्तानगंज, मुंगेर सदर, तारापुर और बारीपारपुर के इलाकों में किया जाएगा, जिससे करीब 12,000 लोग प्रभावित होंगे।

कुल मिलाकर, इस विशाल परियोजना से राज्य के 26,000 से अधिक भूमिधारक सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।

मुआवजे का गणित: किसानों को मिलेगा भारी लाभ

जमीन अधिग्रहण की यह पूरी प्रक्रिया बिहार रैयती भूमि खरीद नीति 2020 (संशोधित 2026) के तहत संचालित की जाएगी। सरकार ने मुआवजे के लिए बेहद आकर्षक प्रावधान रखे हैं ताकि किसानों और जमीन मालिकों को आर्थिक नुकसान न हो:

  • ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण इलाकों में जमीन मालिकों को बाजार मूल्य का चार गुना तक मुआवजा मिल सकता है।
  • शहरी क्षेत्र: शहरी इलाकों में बाजार मूल्य का दोगुना और न्यूनतम आर्थिक (ME) दर के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा, मालिकों को 10% अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।

प्रशासन का कहना है कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य आपसी सहमति से सीधे जमीन खरीदना है, ताकि कानूनी जटिलताओं से बचा जा सके। औपचारिक अधिग्रहण कानूनों का सहारा केवल तभी लिया जाएगा जब आपसी सहमति न बन पाए।

जमीन की जांच और प्रशासनिक निगरानी

अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल और मैनुअल दोनों माध्यमों से रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है। इसमें बिहार टेनेंसी एक्ट, 1885 और बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 के तहत जमीन के मालिकाना हक और इतिहास की गहन जांच की जा रही है।

परियोजना की लागत के आधार पर इसकी निगरानी के लिए दो स्तरों पर समितियां बनाई गई हैं:

  1. 100 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट: जिला मजिस्ट्रेट (DM) की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति को मंजूरी देने का अधिकार होगा।
  2. 100 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट: इनके लिए मंडल आयुक्त (Divisional Commissioner) के नेतृत्व वाली समिति निर्णय लेगी।

इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक कार्यों में सहायता के लिए एक कंसल्टेंट एजेंसी भी नियुक्त की जाएगी।

राजनीतिक विरोध और विवाद का साया

जहां एक ओर सरकार इसे विकास की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर इस परियोजना को लेकर राजनीतिक विरोध भी शुरू हो गया है। सांसद सुधाकर सिंह ने इस नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने जुलाई 2026 में 2026 की भूमि खरीद नीति को रद्द करने की मांग की थी। उनका तर्क है कि यह नीति निजी संस्थाओं को बड़े पैमाने पर जमीन हासिल करने की अनुमति देकर किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकती है।

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