बिहार में जलवायु अनुकूल कृषि से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

बिहार में खेती के पारंपरिक तरीकों को बदलकर अब वैज्ञानिक और आधुनिक बनाने की बड़ी तैयारी की जा रही है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने घोषणा की है कि राज्य में 'चतुर्थ कृषि रोड मैप' के तहत जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम (CRA) को तेजी से लागू किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के कारण पैदा होने वाली चुनौतियों, जैसे बाढ़, सूखा और तापमान में अचानक बदलाव से निपटना और किसानों की आय को सुरक्षित करना है।
1,200 गांवों तक पहुंचेगा आधुनिक खेती का असर
कृषि मंत्री ने बताया कि इस कार्यक्रम को राज्य के 24 जिलों में बड़े स्तर पर संचालित किया जाएगा। योजना का विस्तार कुछ इस तरह होगा:
- प्रत्येक जिले से 5 प्राथमिक गांवों का चयन किया जाएगा, जिससे कुल 120 प्राथमिक गांव चिह्नित होंगे।
- प्रत्येक प्राथमिक गांव के साथ 9 द्वितीयक गांवों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा।
- इस प्रकार, कुल 1,200 गांवों में जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 14.06 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत' के संकल्प और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के विजन के अनुरूप है।
बीजों के लिए मिलेगा MSP से 30% ज्यादा मुनाफा
किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने एक विशेष रणनीति बनाई है। योजना के तहत सभी 24 चयनित जिलों में 30-30 एकड़ के 'सीड हब' स्थापित किए जाएंगे, जिससे कुल 720 एकड़ में बीज उत्पादन बढ़ेगा।
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बिहार राज्य बीज निगम लिमिटेड किसानों से उत्पादित बीजों की खरीद सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से 30 प्रतिशत अधिक दर पर करेगा। इससे किसान गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के लिए प्रोत्साहित होंगे और उन्हें अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा।
रबी और गरमा मौसम के लिए आधुनिक तकनीक
कृषि मंत्री के अनुसार, कार्यक्रम के माध्यम से कुल 27,600 एकड़ में विभिन्न फसलों की खेती का प्रबंधन किया जाएगा:
- रबी मौसम (18,000 एकड़): इसमें जीरो टिलेज तकनीक से गेहूं, चना और मसूर की खेती होगी। इसके अलावा, रेज्ड बेड तकनीक का उपयोग मक्का, सरसों, अलसी, मसालों और सब्जियों के लिए किया जाएगा।
- गरमा मौसम (9,600 एकड़): इस दौरान मक्का, मूंग, उड़द, मोटे अनाज, सूरजमुखी, तिल, हरी खाद (ढैंचा) और सब्जियों की खेती पर जोर दिया जाएगा।
इसके साथ ही, मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए नियमित मृदा परीक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए 'लीफ कलर चार्ट' को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
मधुमक्खी पालन और सिंचाई की नई सुविधाएं
योजना केवल फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि के अन्य सहायक क्षेत्रों को भी मजबूती प्रदान करेगी:
- सरसों उत्पादक क्षेत्रों में प्रति गांव 10 बी-बॉक्स के माध्यम से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जाएगा।
- जल संरक्षण के लिए 25 एकड़ क्षेत्र में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली लगाई जाएगी।
- जैविक खाद के उपयोग को बढ़ाने के लिए 10 वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों की स्थापना की जाएगी।
- किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिए चयनित गांवों में कस्टम हायरिंग सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे।