सुधा डेयरी: किसानों के खातों में आए 68 करोड़, CM ने किया बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कॉम्फेड के कमांड सेंटर का उद्घाटन किया और 1 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों के खातों में 68.51 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए।

बिहार के पशुपालकों और दुग्ध उत्पादक किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कॉम्फेड (Comfed) के नए 'इंटिग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने न केवल आधुनिक तकनीक का आगाज़ किया, बल्कि सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से लाखों किसानों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये की राशि भी ट्रांसफर की।
सीधे बैंक खातों में पहुंचा पैसा
मुख्यमंत्री ने पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए 5,832 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों से जुड़े 1,06,063 लाभार्थियों के बैंक खातों में कुल 68 करोड़ 51 लाख 27 हजार 60 रुपये हस्तांतरित किए। यह भुगतान लगभग 1.46 करोड़ लीटर दूध की आपूर्ति के बदले किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य बिचौलियों को खत्म करना और किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य सीधे उनके खातों में पहुंचाना है।
'सुधा' ब्रांड अब बनेगा ग्लोबल
बिहार की पहचान बन चुका 'सुधा' ब्रांड अब केवल राज्य तक सीमित नहीं रहेगा। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव कपिल अशोक ने बताया कि 'सुधा' का विस्तार बिहार के बाहर भी शुरू हो चुका है।
- असम में विस्तार: असम के तेजपुर में प्रतिदिन 20 हजार लीटर क्षमता वाली इकाई शुरू हो चुकी है, जबकि 50 हजार लीटर की एक और इकाई लगाने की योजना है।
- कोलकाता में मौजूदगी: कोलकाता में भी 10 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाली इकाई स्थापित करने की तैयारी है।
- अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य: सरकार का विजन 'सुधा' को एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के रूप में स्थापित करना है, जिसके लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर विपणन व्यवस्था पर काम किया जा रहा है।
पशुपालकों के लिए नई सुविधाएं और डिजिटल निगरानी
पशुपालकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक नया कॉल सेंटर 'सुधा संपर्क' शुरू किया गया है। इसके लिए टोल फ्री नंबर 18003456199 जारी किया गया है। इसके अलावा, दूध के संग्रहण और परिवहन की रियल टाइम निगरानी के लिए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया गया है, जिससे व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य में 3,200 'सुधा सखी' तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, जीविका के सहयोग से 31 मार्च 2027 तक सभी 8,053 पंचायतों में 'जीविका-सुधा बिक्री केंद्र' स्थापित किए जाएंगे।
भविष्य का लक्ष्य: 50 लाख लीटर दूध उत्पादन
राज्य में वर्तमान में प्रतिदिन करीब 23.90 लाख किलोग्राम दूध का संग्रहण हो रहा है, जिसे वित्तीय वर्ष 2026-27 तक बढ़ाकर 50 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को आधुनिक बनाने के लिए उन्हें 'यूनिक फार्मर आईडी' दी जाएगी, जिससे दूध की गुणवत्ता, फैट और एसएनएफ की मात्रा की डिजिटल निगरानी संभव हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुपालन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार का लक्ष्य बिहार के दूध, सब्जियों और मछली को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना है ताकि किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो सके।