बिहार में सहकारी समितियों को मजबूत बनाने पर जोर, सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक

बिहार राज्य सहकारी नीति 2026 के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई।
- केंद्रीय सहकारी बैंकों, पैक्स और शीर्ष समितियों के अध्यक्ष शामिल हुए।
- सहकारी अधिनियम और नियमावली में संशोधन पर चर्चा की गई।
- सदस्यता प्रक्रिया को सरल बनाने और कर्मचारियों की सुरक्षा पर विचार हुआ।
बैठक में प्रमुख विषयों पर चर्चा
पटना में 31 अगस्त को सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव की अध्यक्षता में केन्द्रीय सहकारी बैंकों के अध्यक्षों, पैक्स अध्यक्षों एवं शीर्ष सहकारी समितियों के अध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इस बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह तथा निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार रजनीश कुमार सिंह सहित विभागीय पदाधिकारी एवं सहकारी क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में विभागीय पदाधिकारियों ने बिहार राज्य सहकारी नीति 2026 के प्रावधानों के आलोक में सहकारी अधिनियम, नियमावली एवं उपविधियों में आवश्यक संशोधन के लिए चिन्हित प्रमुख क्षेत्रों पर प्रस्तुतीकरण दिया। इसके साथ ही सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों से अन्य आवश्यक क्षेत्रों में संशोधन एवं सुधार के संबंध में सुझाव आमंत्रित किए गए।
सदस्यता और कार्यप्रणाली में सुधार
बैठक में सहकारी समितियों की सदस्यता प्रक्रिया को अधिक सरल एवं प्रभावी बनाने तथा सदस्यता से संबंधित अपील की प्रक्रिया को सुगम करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक नियंत्रण एवं पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। बैठक में सहकारी समितियों के कर्मचारियों से संबंधित विषयों पर भी महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए। कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा तथा नियमित वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था किए जाने, कर्मचारियों के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने तथा वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन में अनावश्यक विलंब अथवा उल्लंघन की स्थिति में आर्थिक दायित्व निर्धारित करने संबंधी प्रावधानों में आवश्यक संशोधन पर चर्चा की गई। साथ ही, समितियों के लाभ से एक विशेष तकनीकी विकास कोष के गठन तथा कमजोर सहकारी समितियों के पुनरुद्धार के लिए विशेष सहकारी संरचना/समिति के गठन की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
समितियों के भंग होने के प्रावधानों की समीक्षा
बैठक में सहकारी समितियों के शीघ्र भंग होने से संबंधित वर्तमान प्रावधानों की भी समीक्षा की आवश्यकता व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों द्वारा सुझाव दिया गया कि आधे से अधिक सदस्यों के त्यागपत्र देने की स्थिति में समिति के भंग होने संबंधी प्रावधान को आवश्यकतानुसार शिथिल किया जाए, ताकि कार्यशील एवं उपयोगी सहकारी समितियों का निरंतर संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
पैक्सों में व्यवसाय विविधीकरण पर जोर
बैठक में मंत्री ने विशेष रूप से पैक्सों में व्यवसाय विविधीकरण एवं आय के नए स्रोत विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पैक्सों को केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय विभिन्न आर्थिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता है। स्थानीय संसाधनों, कृषि उत्पादों एवं बाजार की संभावनाओं के अनुरूप नए उद्यमों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे पैक्स की आय में वृद्धि के साथ-साथ किसानों को भी उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य एवं विभिन्न सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकें।
नवाचारी प्रयोगों की सराहना
मंत्री ने विभिन्न पैक्सों एवं सहकारी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे नवाचारी प्रयोगों एवं उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की गई। विशेष रूप से कैमूर जिले के दादर पैक्स द्वारा दादर नीर एवं सरसों तेल जैसे उत्पादों के निर्माण एवं विपणन की पहल को सराहनीय बताया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचारी प्रयास अन्य पैक्सों के लिए भी प्रेरणादायक हैं और सहकारी संस्थाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मंत्री ने कहा कि सहकारी समितियों के माध्यम से रोजगार, उद्यमिता एवं स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की व्यापक संभावनाएं हैं। पैक्स एवं अन्य सहकारी संस्थाओं को उनकी स्थानीय आवश्यकताओं एवं क्षमताओं के अनुरूप नए उद्यमों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। इससे सहकारिता का लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण समुदाय तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।