बिहार में डेटा एंट्री ऑपरेटरों का हल्ला बोल, 15 नवंबर को महाबंदी की चेतावनी
बिहार के 38 जिलों में डेटा एंट्री ऑपरेटरों ने राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। मांगें पूरी न होने पर 15 नवंबर को कंप्यूटर बंद करने की चेतावनी।

बिहार के सभी 38 जिलों में सरकारी कामकाज को ठप करने की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार डेटा एंट्री ऑपरेटरों का विरोध अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। 'बिहार राज्य डेटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा' के बैनर तले हजारों कर्मियों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं।
राज्य कर्मचारी का दर्जा और नियमितीकरण की मांग
प्रदर्शनकारी डेटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, स्टेनोग्राफर और आईटी कर्मी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- उन्हें 'राज्य कर्मचारी' का दर्जा दिया जाए।
- उनकी सेवाओं का नियमितीकरण किया जाए।
- नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- हाल ही में समाप्त किए गए 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि को फिर से लागू किया जाए।
पटना से लेकर भागलपुर तक प्रदर्शन का असर
1 नवंबर, 2026 को बिहार के लगभग सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन और रोड मार्च आयोजित किए गए। पटना में, गांधी मैदान से शुरू हुआ एक विशाल रोड मार्च जेपी गोलंबर पर पहुंचा, जहां पुलिस के साथ झड़प की स्थिति बनी। इसके बाद प्रदर्शनकारी डाकबंगला चौराहा पर जमा हुए।
केवल राजधानी ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों में भी विरोध की लहर देखी गई। भागलपुर में प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के गेट पर प्रदर्शन किया, वहीं मधुबनी, शेखपुरा और जमुई में भी कर्मियों ने जमकर नारेबाजी की।
15 नवंबर को 'कंप्यूटर बंद' करने की चेतावनी
संयुक्त मोर्चा ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 15 नवंबर, 2026 को पूरे राज्य में 'कंप्यूटर बंद' का आंदोलन शुरू किया जाएगा। यदि यह हड़ताल होती है, तो सरकारी कार्यालयों के कामकाज पूरी तरह से बाधित हो सकते हैं।
इस संभावित अशांति को देखते हुए, बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (Beltron) ने सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को पत्र लिखकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया है। फिलहाल, सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।