विकास और पर्यावरण का संतुलन: बिहार में तेजी से हो रहा काम - सम्राट चौधरी

Ghazala Saheb17 October 20262 min read0 viewsBihar
विकास और पर्यावरण का संतुलन: बिहार में तेजी से हो रहा काम - सम्राट चौधरी

पटना में आयोजित 'नेक संवाद' कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में विकास और पर्यावरण के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाया जा रहा है। उन्होंने यह बात नेपाल से देहरादून तक साइकिल यात्रा करने वाले एक दल का स्वागत करते हुए कही, जिनका थीम 'प्रकृति ही प्रभु है' है। मुख्यमंत्री ने राज्य की प्रगति का खाका खींचते हुए बताया कि विकास की गति को प्रकृति के साथ जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है।

हरित आवरण और सिंचाई में क्रांतिकारी बदलाव

मुख्यमंत्री ने राज्य के पर्यावरणीय सुधारों पर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि बिहार-झारखंड बंटवारे के बाद राज्य का हरित आवरण (Green Cover) घटकर मात्र 6 प्रतिशत रह गया था। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी के नेतृत्व में पिछले दो दशकों में जल संरक्षण और वृक्षारोपण के कार्यों ने बड़ा बदलाव लाया है।

आज बिहार की स्थिति काफी बेहतर है:

  • हरित आवरण: जो पहले 6% था, वह अब बढ़कर 15% हो गया है।
  • सिंचाई क्षमता: बिहार की सिंचित भूमि जो पहले 21 लाख हेक्टेयर थी, अब बढ़कर 44 लाख हेक्टेयर हो गई है।

बाढ़ प्रबंधन और नदियों के लिए स्थायी योजना

बाढ़ की समस्या पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष वर्षा में 32 प्रतिशत की कमी आई थी, फिर भी नेपाल से आने वाले पानी के कारण बिहार में बाढ़ की स्थिति बनी। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार गंडक, कोसी और गंगा नदी के पानी को व्यवस्थित करने की योजना पर काम कर रही है।

सोन नदी के संबंध में एक बड़ी उपलब्धि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच जल बंटवारे पर सहमति बन गई है। इसके तहत इन्द्रपुरी बराज का निर्माण किया जाएगा और सोन नदी के पानी को फल्गु नदी से जोड़ने का कार्य किया जाएगा।

महिला सशक्तिकरण: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए महिलाओं की भूमिका को केंद्र में रखा गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ रही हैं:

  • कुल 1 करोड़ 81 लाख महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ी हुई हैं।
  • 50 लाख महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाया जा चुका है।
  • 60 लाख महिलाओं को 'पशु सखी' के रूप में तैयार किया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक बिहार की सभी महिलाओं को पूरी तरह से स्किल्ड (Skilled) बनाया जाए, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो सके।

ईको टुरिज्म और ग्रीन एनर्जी पर विशेष जोर

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में ईको टुरिज्म और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं। जल प्रबंधन के माध्यम से पानी के सदुपयोग की कार्ययोजना तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि बिहार अपने गौरवशाली इतिहास को फिर से दोहराएगा और विकास के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।

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