बिहार में अब ई-कैबिनेट से होंगे फैसले, सम्राट चौधरी ने दिया डिजिटल क्रांति का मंत्र
बिहार में ई-कैबिनेट व्यवस्था लागू होने से फैसले लेना होगा तेज और पारदर्शी। सम्राट चौधरी ने एआई और कागजरहित प्रशासन पर दिया जोर।

बिहार में प्रशासनिक कामकाज को पूरी तरह बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में राज्य में ई-कैबिनेट व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम तेज कर दिए गए हैं। इस नई व्यवस्था से न केवल सरकारी फैसलों की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि शासन में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
सुशासन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम
पटना के लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में आयोजित इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-कैबिनेट व्यवस्था सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। अब कैबिनेट से संबंधित फाइलों का आदान-प्रदान पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। इससे फाइलों के निपटारे में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, डिजिटल माध्यम से फाइलों के आदान-प्रदान से प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेगी। इससे सरकारी कामकाज की गति में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी।
एआई और कागजरहित प्रशासन पर जोर
मुख्यमंत्री ने केवल डिजिटलीकरण पर ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का अधिकतम उपयोग करके प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, सुगम और दक्ष बनाया जाना चाहिए।
इस व्यवस्था के लागू होने से बिहार में 'कागजरहित प्रशासन' की दिशा में बड़ी प्रगति होगी। इससे न केवल सरकारी संसाधनों और समय की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार का लक्ष्य प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाना है।
बैठक के दौरान मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने ई-कैबिनेट व्यवस्था के कार्यान्वयन और इसके तकनीकी पहलुओं पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया, जिसमें इसके प्रभावी क्रियान्वयन की रूपरेखा साझा की गई।