बिहार के इको-टूरिज्म केंद्रों पर बढ़ा पर्यटकों का भारी आकर्षण, दो वर्षों में संख्या बढ़कर हुई 74 लाख के पार

बिहार में पर्यटन अब केवल ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं रह गया है। प्राकृतिक खूबसूरती, वन्यजीव, रोमांच और आधुनिक सुविधाओं से सजे इको-टूरिज्म केंद्र पर्यटकों को तेजी से आकर्षित कर रहे हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित इन इको-टूरिज्म केंद्रों पर पर्यटकों की संख्या में महज दो वर्षों में करीब 35.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 में जहां पूरे बिहार के इको-टूरिज्म केंद्रों पर 55,20,156 पर्यटक पहुंचे थे, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 74,90,847 हो गई। यानी पर्यटकों की संख्या करीब 1.36 गुना हो गई है। दो वर्षों में इनकी संख्या 1.36 गुना हो गई है और पटना से यह रिपोर्ट सामने आई है।
राजगीर नेचर सफारी में पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी
इको-टूरिज्म की बढ़ती लोकप्रियता का सबसे प्रमुख उदाहरण राजगीर नेचर सफारी है। वर्ष 2022-23 में यहां करीब 1.59 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2024-25 में यह संख्या बढ़कर लगभग 3 लाख हो गई। यानी दो वर्षों में पर्यटकों की संख्या करीब 1.89 गुना हो गई। राजगीर की पहाड़ियों और हरियाली के बीच विकसित नेचर सफारी में प्रकृति के साथ रोमांच का अनूठा संगम देखने को मिलता है। ग्लास स्काईवॉक, जिपलाइन, स्काई साइकिलिंग और सस्पेंशन ब्रिज जैसे आकर्षण पर्यटकों को खासा लुभा रहे हैं। इसके अलावा आर्चरी, राइफल शूटिंग, ट्रैंपोलिन और वॉल क्लाइंबिंग जैसी गतिविधियां इसे परिवारों, बच्चों और युवाओं के लिए भी खास बनाती हैं।
करमचट डैम और भीमबांध में पर्यटकों के आंकड़े
कैमूर का करमचट डैम भी पर्यटकों की बढ़ती पसंद का उदाहरण बनकर उभरा है। यहां वर्ष 2022-23 में 46,163 पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2024-25 में संख्या बढ़कर 1,49,832 हो गई। यानी दो वर्षों में पर्यटकों की संख्या 3.25 गुना से अधिक हो गई। प्राकृतिक जलाशय, पहाड़ी परिदृश्य और हरियाली के बीच पर्यटन की संभावनाओं ने इस क्षेत्र को तेजी से लोकप्रिय बनाया है। मुंगेर स्थित भीमबांध इकोटूरिज्म सेंटर में भी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में यहां 35,093 पर्यटक पहुंचे थे, जो 2024-25 में बढ़कर 85,868 हो गए। इस तरह यहां पर्यटकों की संख्या करीब 2.45 गुना हो गई।
मंदार हिल और नागी-नकटी बने पर्यटकों के नए ठिकाने
बांका स्थित मंदार हिल इकोटूरिज्म सेंटर में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2022-23 में करीब 80 हजार पर्यटक यहां पहुंचे थे, जबकि 2024-25 में यह संख्या बढ़कर करीब 98 हजार हो गई। वहीं, जमुई स्थित नागी-नकटी बर्ड सेंचुरी में 2022-23 के 30,797 पर्यटकों के मुकाबले 2024-25 में 48,068 पर्यटक पहुंचे। यहां पक्षियों की विविधता और प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख कारण है।
इको-टूरिज्म के विकास के लिए निजी निवेश और योजनाएं
बिहार में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने का उद्देश्य प्राकृतिक एवं वन्यजीव क्षेत्रों के संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करना है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, भीमबांध, ककोलत जलप्रपात, कैमूर के वन क्षेत्र, गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य, नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी, पश्चिमी चंपारण के उदयपुर वन क्षेत्र और मंदार हिल जैसे स्थल राज्य के इको-टूरिज्म सर्किट को मजबूत कर रहे हैं। विभाग ने इको-टूरिज्म के विकास में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए 13 जुलाई को इकोटूरिज्म इन्वेस्टर्स मीट 2026 का आयोजन किया था। पीपीपी मॉडल के तहत डीबीएफओटी आधार पर परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। विभाग ने निवेश के लिए 276 परियोजनाओं की पहचान की है, जिनमें 29 जलाशय आधारित और 247 तालाब, झील, आर्द्रभूमि व अन्य जल निकायों से जुड़ी परियोजनाएं हैं। चयनित डेवलपर्स को स्थल 30 वर्ष की लीज पर दिए जाएंगे और सरकार समयबद्ध स्वीकृति, वीजीएफ तथा बिहार पर्यटन नीति के तहत प्रोत्साहन उपलब्ध कराएगी।