बिहार शिक्षा विभाग सुधार: क्लर्कों के तबादले और सातवें वेतनमान पर बड़ी घोषणा

Ghazala Saheb21 October 20262 min read0 viewsBihar
बिहार शिक्षा विभाग सुधार: क्लर्कों के तबादले और सातवें वेतनमान पर बड़ी घोषणा

बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी ने बिहार शिक्षा विभाग सुधार की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। एमएलसी चुनाव के बीच लिए गए इन महत्वपूर्ण फैसलों का उद्देश्य विभाग में पारदर्शिता लाना, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करना है। मंत्री ने क्लर्कों के तबादले, सातवें वेतनमान की समीक्षा और आधुनिक 'गुरुकुलम' की स्थापना जैसी बड़ी घोषणाएं की हैं।

क्लर्कों का होगा राज्य स्तरीय तबादला, भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

मंत्री तिवारी ने पुष्टि की है कि क्लर्क कर्मचारियों का अब राज्य स्तर पर तबादला किया जाएगा। वर्तमान में, कई क्लर्क लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात हैं, जिससे शिक्षकों के शोषण और रिश्वत मांगने जैसी शिकायतों का मुद्दा लगातार उठता रहा है। राज्यसभा सांसद अनिल यादव ने भी इस संबंध में चिंता जताई थी कि कर्मचारी शिक्षकों का शोषण कर रहे हैं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, क्लर्कों का वर्तमान कैडर 'डिविजनल' है, जिसे अब 'स्टेट लेवल' में बदलने की प्रक्रिया जारी है। क्षेत्रीय उपनिदेशक (शिक्षा) सुभाष कुमार गुप्ता ने भी इस प्रक्रिया की पुष्टि की है। यह तबादला प्रक्रिया छठ पूजा के त्योहार के बाद शुरू होने की उम्मीद है।

सातवें वेतनमान पर 30 दिनों के भीतर होगा निर्णय

शिक्षकों के सातवें वेतनमान (Seventh Pay Scale) को लेकर भी एक बड़ा अपडेट आया है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस विषय पर 30 दिनों के भीतर एक औपचारिक निर्णय ले लिया जाएगा।

अधिकारियों को इस संबंध में निम्नलिखित निर्देश दिए गए हैं:

  • अन्य राज्यों में शिक्षकों को मिलने वाली सुविधाओं का बिहार के साथ तुलनात्मक अध्ययन किया जाए।
  • इस निर्णय के कारण राज्य के बजट पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव की सटीक गणना की जाए।

गौरतलब है कि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी वर्तमान एमएलसी चुनाव अभियान के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। चुनाव के नतीजे 27 अक्टूबर, 2026 को घोषित किए जाएंगे।

'गुरुकुलम' योजना: विज्ञान और वैदिक शिक्षा का अनूठा संगम

शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार 'गुरुकुलम' स्थापित करने की योजना बना रही है। इसकी शुरुआत भागलपुर से की जाएगी, जहाँ हाल ही में शिक्षा विभाग में लगभग 9.812 मिलियन रुपये के गबन का मामला सामने आया था। इसके बाद बक्सर में भी ऐसे संस्थान खोले जाएंगे।

इन गुरुकुलों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार होंगी:

  • एकीकृत शिक्षा: यहाँ प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शोध (Research) तक की पढ़ाई की सुविधा होगी।
  • आधुनिक पाठ्यक्रम: छात्रों को वैदिक अध्ययन और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ-साथ विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंग्रेजी और हिंदी साहित्य की शिक्षा दी जाएगी।
  • विशेष सहयोग: इन संस्थानों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति दक्षिण भारत से की जाएगी। इस परियोजना में कांची कामकोटी पीठ शंकराचार्य और बैंगलोर स्थित सत्य साईं संस्थान का सहयोग प्राप्त होगा।
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