बिहार शिक्षा विभाग में ₹34 करोड़ का महाघोटाला! वेतन में भारी हेराफेरी, DEOs को नोटिस

बिहार के शिक्षा विभाग में ₹34.11 करोड़ की वेतन अनियमितता का खुलासा हुआ है। विभाग ने सभी DEOs से 7 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा है।

Ghazala Saheb6 November 20262 min read0 viewsBihar
बिहार शिक्षा विभाग में ₹34 करोड़ का महाघोटाला! वेतन में भारी हेराफेरी, DEOs को नोटिस

बिहार के शिक्षा विभाग में एक बहुत बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विभाग ने राज्य के सभी 38 जिलों में वेतन, मकान भत्ता और एरियर भुगतान में करीब 34.11 करोड़ रुपये की भारी अनियमितता का पता लगाया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और उनसे 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।

6,895 कर्मचारियों पर असर और जांच का दायरा

इस घोटाले का दायरा बेहद बड़ा है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस गड़बड़ी से राज्य भर के लगभग 6,895 शिक्षक और कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य के 38 जिलों में फैले हुए सिस्टम में सेंधमारी की गई है।

कैसे हुआ करोड़ों का खेल? तकनीकी हेराफेरी का खुलासा

जांच में यह बात सामने आई है कि इस घोटाले को अंजाम देने के लिए डिजिटल सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों ने पाया कि वेतन प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले निम्नलिखित सिस्टम्स में हेरफेर की गई:

  • HRMS (Human Resource Management System): इसमें फर्जी आईडी बनाकर या डेटा बदलकर गड़बड़ी की गई।
  • CFMS (Comprehensive Financial Management System): डिजिटल भुगतान पोर्टल तक अनधिकृत पहुंच बनाकर भत्तों की राशि को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रारंभिक रिपोर्टों से संकेत मिलते हैं कि इस पूरे खेल में सिस्टम के तीन मुख्य स्तरों—'मेकर' (Maker), 'चेकर' (Checker) और 'अप्रूवर' (Approver) के बीच मिलीभगत थी। इन अधिकारियों ने मिलकर फर्जी आईडी बनाईं और भत्तों की राशि में अवैध रूप से वृद्धि की।

भागलपुर में सबसे ज्यादा गड़बड़ी: 1.84 करोड़ की वसूली का आदेश

इस पूरे घोटाले में भागलपुर जिला विशेष रूप से जांच के घेरे में है। अधिकारियों ने भागलपुर में 1.84 करोड़ रुपये की अनियमितता पाई है और विभाग ने इस राशि की वसूली करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

CAG की रिपोर्ट के बाद बढ़ी सख्ती

यह पूरा मामला नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बाद सुर्खियों में आया है। इसके बाद, बिहार वित्त विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने 9 अक्टूबर, 2026 को एक निर्देश जारी किया था, जिसमें सभी वेतन बिलों के सख्त ऑडिट का आदेश दिया गया था।

"राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि यदि कोई भी अधिकारी इस प्रणालीगत हेरफेर के लिए जिम्मेदार पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और गलत तरीके से दिए गए अतिरिक्त भुगतान की वसूली की जाएगी।"

फिलहाल, विभाग सभी जिला शिक्षा अधिकारियों के जवाबों का इंतजार कर रहा है। यदि 7 दिनों के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलता है, तो संबंधित अधिकारियों पर और भी कड़ी कार्रवाई की संभावना है।

Share:

Comments

Leave a comment