फर्जी आईडी से 98 लाख का गबन: बिहार शिक्षा विभाग में हड़कंप, HRMS में बड़े बदलाव
भागलपुर में फर्जी आईडी से 98 लाख के वेतन गबन के बाद बिहार शिक्षा विभाग ने HRMS सिस्टम में बदलाव किया है और DEOs से 7 दिन में रिपोर्ट मांगी है।

बिहार के भागलपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक फर्जी शिक्षिका की आईडी का इस्तेमाल कर 98.12 लाख रुपये के वेतन का गबन कर लिया गया। इस फर्जी आईडी वेतन गबन के मामले ने पूरे राज्य के शिक्षा विभाग की वित्तीय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग की नाक के नीचे हुए इस बड़े घोटाले के बाद अब मुख्यालय ने पूरे बिहार में कड़े कदम उठाने का फैसला किया है।
HRMS सिस्टम में होगा बड़ा बदलाव
इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग के मुख्यालय ने 'मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली' (HRMS) के माध्यम से होने वाले भुगतान की प्रक्रिया में तत्काल प्रभाव से बदलाव करने का आदेश दिया है। विभाग अब तकनीकी खामियों और मिलीभगत की संभावनाओं को खत्म करने के लिए सिस्टम को और अधिक सुरक्षित बना रहा है।
- वेतन जारी करने से पहले अब कई चरणों में सत्यापन (Verification) अनिवार्य कर दिया गया है।
- भविष्य में तकनीकी छेड़छाड़ रोकने के लिए नए नियम लागू किए जाएंगे।
- डेटा और भुगतान प्रक्रिया की निगरानी को और अधिक सख्त बनाया जाएगा।
DEOs को 7 दिनों का अल्टीमेटम
मामले की जांच और अन्य जिलों में ऐसी किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने बिहार के सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEOs) को एक 'हाई-अलर्ट' नोटिस जारी किया है।
मुख्य सचिव ने सभी DEOs को निर्देश दिया है कि वे अगले 7 दिनों के भीतर अपने-अपने जिलों के शिक्षकों के डेटा और वित्तीय रिपोर्ट का विस्तृत मिलान कर मुख्यालय को सौंपें। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कहीं किसी अन्य जिले में भी इस तरह की फर्जी आईडी बनाकर सरकारी खजाने को चूना तो नहीं लगाया जा रहा है।
"इस वित्तीय गबन के खुलासे के बाद मुख्यालय बेहद सख्त है। विभाग का लक्ष्य है कि भविष्य में ऐसी किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक चूक की गुंजाइश न रहे।"
दोषी अधिकारियों पर गिरेगी गाज
मुख्यालय की इस कार्रवाई से विभाग के भीतर हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी दोषी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच के दायरे में वे सभी लोग होंगे जिनकी मिलीभगत से इस तरह का बड़ा वित्तीय घोटाला संभव हो सका।