बिहार में बाढ़ का संकट गहराया, गंगा और अन्य नदियां खतरे के निशान से ऊपर

Ghazala Saheb4 September 20262 min read18 viewsBihar
बिहार में बाढ़ का संकट गहराया, गंगा और अन्य नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में 4 सितंबर 2026 तक बाढ़ का संकट बहुत बढ़ गया है, जहाँ गंगा, गंडक, कोसी और सोन जैसी मुख्य नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इस आपदा से राज्य के सैकड़ों गांव प्रभावित हुए हैं और 16 जिलों में बाढ़ फैल गई है। भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद सहित आठ जिलों में आधिकारिक तौर पर हाई अलर्ट घोषित किया गया है।

गंगा का जलस्तर और चेतावनी

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने चेतावनी दी है कि आज दोपहर तक गंगा नदी के अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से ऊपर जाने की आशंका है। पटना में गांधी घाट के पास गंगा खतरे के निशान से 1.65 मीटर ऊपर बह रही है। स्थानीय प्रशासन ने शहर में पानी घुसने से रोकने के लिए शहरी सुरक्षा दीवार के सभी 108 गेट बंद कर दिए हैं, हालांकि बाढ़ का पानी पटना सिटी में घरों और निचले रास्तों में भर चुका है। मुंगेर में जलस्तर 38.86 मीटर है जो खतरे के निशान से सिर्फ 47 सेंटीमीटर नीचे है, जिससे 28 स्कूलों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा है। भागलपुर में गंभीर कटाव के कारण 100 साल पुराना मंदिर डूब गया है और रधुपुर-कनझकोरिया तटबंध खतरे में है।

नदियों का जलस्तर और बैराज से पानी छोड़ा जाना

सोन नदी पर इंद्रापुरी बैराज से पानी का डिस्चार्ज दोपहर 2:00 बजे तक 5.18 लाख क्यूसेक पहुंच गया। सुपौल में कोसी बैराज पर 2.22 लाख क्यूसेक पानी दर्ज किया गया है, जबकि डुमरियाघाट पर गंडक नदी खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर 62.92 मीटर पर बह रही है। पश्चिमी चंपारण से मिली रिपोर्ट के अनुसार नेपाल के रसुवा में भोटेकोसी नदी की बाढ़ से गंडक में बहकर आए शवों से सार्वजनिक स्वास्थ्य की चिंता पैदा हो गई है।

प्रशासनिक तैयारी और मौसम का हाल

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्थिति की समीक्षा की है और आज प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने वाले हैं, साथ ही राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) को जरूरी सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए हैं। जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद संजय कुमार झा ने पुष्टि की है कि सरकार स्थापित आपदा प्रबंधन नियमों के तहत पूरी तरह अलर्ट मोड में है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज 24 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिसमें चार जिलों में अत्यधिक बारिश का खतरा बताया गया है, जिससे जलस्तर और बढ़ने का खतरा है। विस्थापित हुए लाखों लोगों ने स्कूलों, सड़कों और सामुदायिक भवनों में शरण ली है, और उनके घरों तथा खेती की जमीन को भारी नुकसान हुआ है।

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