बिहार की बड़ी पहल: बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए अब मुफ्त मिलेगी HPV वैक्सीन

बिहार सरकार ने राज्य की बेटियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 'मुख्यमंत्री बालिका कैंसर प्रतिरक्षण योजना' के तहत अब 9 से 14 वर्ष की आयु की लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए मुफ्त में HPV (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) वैक्सीन दी जा रही है। इस योजना के माध्यम से राज्य की बेटियों को भविष्य में होने वाले गंभीर कैंसर के खतरे से सुरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
देश में पहली बार: बिहार सरकार का बड़ा संकल्प
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के नेतृत्व में शुरू की गई यह योजना बिहार को एक विशेष पहचान दिला रही है। बिहार देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जो इस वैक्सीन को पूरी तरह से मुफ्त उपलब्ध करा रहा है। इस महत्वाकांक्षी अभियान का लक्ष्य लगभग एक करोड़ लड़कियों को कवर करना है, जिसके लिए सरकार सालाना करीब 150 करोड़ रुपये का खर्च वहन कर रही है।
सुरक्षा और निगरानी के कड़े इंतजाम
इस टीकाकरण अभियान की पारदर्शिता और सफलता सुनिश्चित करने के लिए 'U-WIN' प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, टीकाकरण प्रक्रिया में सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है; किसी भी बच्ची को टीका लगाने से पहले उसके माता-पिता की सहमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
भागलपुर में टीकाकरण अभियान की सक्रियता
भागलपुर जिले में इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए स्कूलों के साथ विशेष समन्वय किया जा रहा है। 19 सितंबर, 2026 को आनंदराम धंधानिया सरस्वती विद्या मंदिर में एक टीकाकरण सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्घाटन जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. धनंजय कुमार और प्रधानाचार्य सुमंत कुमार ने किया। इस दौरान 33 छात्राओं को वैक्सीन लगाई गई। कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सकों ने इस बात पर जोर दिया कि सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए HPV वैक्सीन एक बेहद जरूरी सुरक्षा कवच है।
बड़ी चुनौती: दूसरी खुराक के लिए छूटी हजारों लड़कियां
इतनी बड़ी योजना और प्रयासों के बावजूद, स्वास्थ्य विभाग के सामने एक गंभीर चुनौती सामने आई है। टीकाकरण का दूसरा चरण (Second Dose) समय पर पूरा न हो पाना एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है।
- भागलपुर की स्थिति: जिले में लगभग 9,000 लड़कियां ऐसी हैं जिन्होंने करीब एक साल पहले पहली खुराक तो ले ली थी, लेकिन अब उनकी दूसरी खुराक बकाया है।
- राज्यव्यापी आंकड़ा: पूरे बिहार में 2.71 लाख से अधिक लड़कियां ऐसी हैं जिन्हें अभी तक दूसरी खुराक नहीं मिल पाई है।
राज्य स्वास्थ्य सोसायटी ने 31 अगस्त तक 100 प्रतिशत कवरेज का लक्ष्य रखा था, लेकिन दूसरी खुराक के मामले में लक्ष्य से पीछे रहने के कारण अब प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है।
प्रशासन का एक्शन प्लान
टीकाकरण के इस अधूरे चक्र को पूरा करने के लिए सिविल सर्जनों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन अब आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं और शिक्षकों की मदद लेगा ताकि उन सभी लड़कियों की पहचान की जा सके जिनकी दूसरी खुराक बाकी है। लक्ष्य यह है कि हर पात्र बच्ची का टीकाकरण चक्र सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके और कोई भी लड़की इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे।