बिहार में बच्चों को बड़ी राहत: जन्मजात विकारों के लिए मुफ्त सर्जरी का महाअभियान

बिहार सरकार ने राज्य के बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत अब जन्मजात विकारों से जूझ रहे बच्चों की पहचान कर उनका मुफ्त ऑपरेशन किया जाएगा। इस विशेष अभियान का उद्देश्य उन बच्चों को नया जीवन देना है जो शारीरिक बनावट या अन्य जन्मजात समस्याओं के कारण विकास में पिछड़ जाते हैं।
किन बीमारियों का होगा मुफ्त इलाज?
इस अभियान के माध्यम से उन बच्चों का इलाज किया जाएगा जो निम्नलिखित समस्याओं से ग्रसित हैं:
- क्लबफुट (Clubfoot): पैरों की बनावट में समस्या।
- कटे होंठ और तालु (Cleft Lip and Palate): मुंह और होंठ की बनावट में दोष।
- टंग-टाई (Tongue-tie): जीभ की गतिशीलता में बाधा।
इन समस्याओं का समय पर इलाज न होने से बच्चों के पोषण, शारीरिक विकास और उनके आत्मविश्वास पर गहरा असर पड़ता है।
14 नवंबर 2026 तक चलेगा विशेष अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए व्यापक योजना बनाई है। यह विशेष अभियान 14 नवंबर 2026 तक जारी रहेगा। इस दौरान मोबाइल मेडिकल टीमों को आंगनवाड़ी केंद्रों का दौरा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि दूर-दराज के इलाकों में भी प्रभावित बच्चों तक पहुंचा जा सके।
आशा कार्यकर्ताओं और डॉक्टरों की भूमिका
अभियान की सफलता के लिए आशा कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें अपने क्षेत्र में ऐसे बच्चों की पहचान करने और उनके माता-पिता को जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है। किशनगंज के ठाकुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आशा कार्यकर्ताओं को लक्षणों की पहचान करने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी गई है ताकि वे लक्षणों को पहचान सकें और माता-पिता को समय पर इलाज के लिए प्रेरित कर सकें।
सर्जरी से पहले की तैयारी और जांच प्रक्रिया
मुफ्त सर्जरी से पहले बच्चों की गहन चिकित्सा जांच की जाएगी। इसमें निम्नलिखित मापदंडों पर ध्यान दिया जाएगा:
- हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) का स्तर।
- WBC काउंट और प्लेटलेट्स की जांच।
- बच्चे का वजन और आयु के अनुसार शारीरिक विकास।
यदि जांच के दौरान किसी बच्चे में हीमोग्लोबिन की कमी पाई जाती है, तो उसे आयरन का उपचार दिया जाएगा। वहीं, यदि बच्चा सर्दी, खांसी, बुखार या दस्त जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, तो सर्जरी से पहले उसका प्राथमिक उपचार किया जाएगा।
परिवहन और प्रशासनिक सहयोग
मरीजों को अस्पताल तक लाने के लिए 102 एम्बुलेंस की सुविधा सुनिश्चित की गई है। साथ ही, RBSK प्री-ऑथोराइजेशन सर्टिफिकेट भी जारी किए जाएंगे ताकि इलाज के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा न आए।
"जन्मजात दोष किसी भी बच्चे के भविष्य में बाधा नहीं बनने चाहिए। हमारा लक्ष्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।"
— डॉ. राज कुमार चौधरी, सिविल सर्जन
जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि बच्चों का स्वस्थ विकास प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिया है कि वे आपसी समन्वय बनाए रखें ताकि यह अभियान समाज के हर जरूरतमंद बच्चे तक पहुंच सके।