खेत बचाओ अभियान: बिहार में किसानों की समृद्धि के लिए सरकार का मास्टर प्लान

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए 'खेत बचाओ अभियान' को एक जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया है। पटना स्थित कृषि भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में उन्होंने इस अभियान की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण के विज़न को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री के विज़न को साकार कर रहा बिहार
मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जोर देकर कहा कि खेती केवल अनाज उत्पादन का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारी सभ्यता, संस्कृति और अर्थव्यवस्था की नींव है। उन्होंने बताया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना है:
- मृदा स्वास्थ्य संरक्षण: मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना।
- जल प्रबंधन: वर्षा जल संचयन और खेतों में नमी बनाए रखना।
- संतुलित उर्वरक उपयोग: रसायनों के बजाय वैज्ञानिक तरीकों को बढ़ावा देना।
- प्राकृतिक खेती: पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना।
"स्वस्थ मिट्टी, संरक्षित जल और जागरूक किसान ही समृद्ध कृषि और आत्मनिर्भर बिहार की मजबूत नींव हैं।" — विजय कुमार सिन्हा
पिछले अभियान की बड़ी सफलता
राज्य में कृषि के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए पहले भी बड़े स्तर पर प्रयास किए गए हैं। मंत्री ने जानकारी दी कि विगत 1 जून से 30 जून तक चलाए गए 'खेत बचाओ अभियान' के दौरान राज्य भर में अभूतपूर्व परिणाम देखने को मिले। इस दौरान:
- कुल 7,275 किसान चौपालों का आयोजन किया गया।
- लगभग 6,19,436 किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक किया गया।
- प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की गई।
आगामी अभियान और भविष्य की रणनीति
बिहार सरकार अब इस अभियान को और अधिक व्यापक बनाने की तैयारी में है। विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, आगामी 26 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2026 तक प्रस्तावित नए अभियान के तहत किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय कर्मियों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा।
इस आगामी चरण में फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन और दलहनी फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से आधुनिक तकनीकों को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बना रहे।